केंद्र के पूंजीगत व्यय से निजी क्षेत्र का भरोसा बढ़ा : सीतारमण

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केंद्र के पूंजीगत व्यय से निजी क्षेत्र का भरोसा बढ़ा : सीतारमण

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 10:28 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 10:28 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय बढ़ाने की नीति से भारतीय अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र का भरोसा मजबूत हुआ है। इससे निजी कंपनियां अब जोखिम उठाकर निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं।

सीतारमण ने कहा कि सभी देशों को अपनी वित्तीय जरूरतों के प्रबंधन के लिए सार्वजनिक ऋण लेना पड़ता है। हालांकि, राज्यों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे केवल उतना ही कर्ज लें, जितना परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए आवश्यक हो और जिसकी अदायगी वे स्वयं कर सकें। कर्ज का बोझ अगली पीढ़ी पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

वित्त मंत्री ने सी डी देशमुख व्याख्यान-2026 में अपने संबोधन में कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने पूरे विश्वास के साथ सार्वजनिक पूंजीगत व्यय जारी रखा, क्योंकि उसे भरोसा था कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। इसी का परिणाम है कि अब निजी क्षेत्र आगे आ रहा है। वे जोखिम उठा रहे हैं और निवेश कर रहे हैं ताकि भारत की वृद्धि दर का लाभ उठा सकें।’’

उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय का प्रावधान बढ़ाकर 12.22 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में यह 3.39 लाख करोड़ रुपये था।

सीतारमण ने कहा, ‘‘मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि जब आप कर्ज लेकर उसका उपयोग परिसंपत्तियों के निर्माण में करते हैं, तो उसका लाभ सरकार और आम जनता दोनों को मिलता है।’’

सीतारमण ने कहा, ‘‘कर्ज लेना जरूरी है, लेकिन यह सोच-समझकर तय करना चाहिए कि कितना कर्ज लेना है, कब लेना है और किस उद्देश्य से लेना है।’’

उन्होंने कहा कि कई राज्य अपने कर्ज को पुनर्गठित करने और ब्याज के बोझ को घटाने का प्रस्ताव लेकर केंद्र सरकार के पास आए हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘राज्यों को यह समझना होगा कि कर्ज लेकर उसे भूल नहीं सकते। आपको उसके लिए जवाबदेह होना होगा। कर्ज क्यों लिया जा रहा है, इसका स्पष्ट कारण होना चाहिए और उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।’’

उन्होंने कहा कि राज्यों को मजबूत बनाना और उनका सहयोग करना जरूरी है, लेकिन विकास के मामले में पिछड़े राज्यों को आगे लाने के लिए विशेष प्रयास भी करने होंगे।

सीतारमण ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता कि कुछ राज्य अच्छा प्रदर्शन करें और कुछ वहीं के वहीं रह जाएं। उन्हें हरसंभव सहयोग देना होगा। साथ ही, देश की रक्षा, निर्यात और विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियों के लिए संसाधन युक्त केंद्र सरकार भी जरूरी है। इन जिम्मेदारियों को केवल राज्यों पर नहीं छोड़ा जा सकता। निवेश और नीतियों को सही दिशा देने के लिए एक मजबूत केंद्र आवश्यक है।’’

भाषा रमण अजय

अजय