कोल इंडिया और एएमएनएस ने पारादीप संयंत्र में सिन-गैस के उपयोग के लिए किया समझौता
कोल इंडिया और एएमएनएस ने पारादीप संयंत्र में सिन-गैस के उपयोग के लिए किया समझौता
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी कोल इंडिया लि. ने आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया प्राइवेट लि. (एएमएनएस इंडिया) के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत ओडिशा में इस्पात कंपनी के पारादीप पेलेट संयंत्र के पास प्रस्तावित कोयले से गैस बनाने के संयंत्र से बनने वाली सिंथेसिस गैस (सिन-गैस) के उपयोग की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा।
कोल इंडिया ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि बुधवार को हुए समझौता ज्ञापन के तहत कोल इंडिया, एएमएनएस के पारादीप पेलेट संयंत्र के समीप या उसी परिसर में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) प्रौद्योगिकी के साथ कोयले से गैस बनाने का संयंत्र स्थापित करने की संभावना पर काम करेगी।
समझौते के शुरुआती रूपरेखा के तहत दोनों कंपनियां प्रस्तावित परियोजना की तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहारिकता का आकलन करेंगी। इसके अलावा परियोजना के क्रियान्वयन के तरीकों की समीक्षा की जाएगी और इसकी व्यावहारिकता का मूल्यांकन करने के लिए प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) तैयार की जाएगी।
कोयला गैसीकरण प्रक्रिया में कोयले को सिंथेसिस गैस में बदला जाता है। इस्पात उद्योग में इसका इस्तेमाल अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन के रूप में किया जाता है।
कंपनी ने कहा कि सिन-गैस आयातित प्राकृतिक गैस का विकल्प बन सकती है और इसे ब्लास्ट फर्नेस में डालकर महंगे आयातित कोकिंग कोयले पर निर्भरता कम की जा सकती है।
कोल इंडिया देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान देती है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने कोयले से गैस बनाने की परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना और एलएनजी, यूरिया तथा मेथनॉल जैसे आयातित उत्पादों पर विदेशी मुद्रा खर्च की निर्भरता कम करना है।
भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक है। देश में करीब 401 अरब टन कोयला और 47 अरब टन लिग्नाइट के भंडार मौजूद हैं।
देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक है।
भाषा रमण अजय
अजय

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