एआई, जैविक बुद्धिमत्ता के मेल से बदल सकता है स्वास्थ्य देखभाल परिदृश्यः मजूमदार-शॉ

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एआई, जैविक बुद्धिमत्ता के मेल से बदल सकता है स्वास्थ्य देखभाल परिदृश्यः मजूमदार-शॉ

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  • Publish Date - February 20, 2026 / 04:43 PM IST,
    Updated On - February 20, 2026 / 04:43 PM IST

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) जैव-प्रौद्योगिकी कंपनी बायोकॉन की कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने शुक्रवार को कहा कि जैविक बुद्धिमत्ता और कृत्रिम मेधा (एआई) का मेल चिकित्सा क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकता है, जिससे भविष्य की बीमारियों का पहले ही अनुमान लगाने, पुनर्निर्माण विज्ञान और जीवनकाल प्रबंधन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति संभव होगी।

मजूमदार-शॉ ने यहां आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘जीव-विज्ञान अपने आप में गहरी समझ विकसित करने में सीमित था, लेकिन एआई उपकरण जीवित प्रणालियों को समझने के लिए असीमित अवसर खोल रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि जैविक प्रणालियां ‘विभक्त डेटा सेंटर’ की तरह काम करती हैं, जो गीगावाट बिजली से चलने वाले एआई प्रणाली की तुलना में बहुत कम ऊर्जा में जानकारी का विश्लेषण करती हैं।

उन्होंने कहा, ‘जीव विज्ञान से एआई को बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है जैसे कि कम ऊर्जा में काम कैसे करें, तेजी से कैसे काम करें और अलग-अलग तरह के डेटा का तुरंत विश्लेषण कैसे करें।’

उन्होंने बताया कि एआई और जीव विज्ञान का संगम एक शक्तिशाली परिवर्तनकारी प्रक्रिया होगी और भारत इस वैश्विक बदलाव का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने कहा कि एआई क्षतिग्रस्त ऊतकों और अंगों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण पर केंद्रित पुनर्योजी विज्ञान को गति दे सकती है और स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल-केंद्रित मॉडल से हटाकर पूर्वानुमानात्मक एवं निवारक सामुदायिक देखभाल की ओर ले जाने में मदद कर सकती है।

डीएनए में निहित पीढ़ीगत सीख के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने प्रवासी पक्षियों की दिशात्मक बुद्धिमत्ता जैसे उदाहरणों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “एआई के बिना जीव विज्ञान की गहरी समझ हासिल करना संभव नहीं है। भविष्य इसी संगम से परिभाषित होगा।”

भाषा सुमित प्रेम

प्रेम