Band Baja Bitiya GOEL TMT Advertisement: 'हिंसा कल्चर नहीं है...ट्रेडिशन नहीं' स्मृति ईरानी ने गोयल टीएमटी की सामाजिक सरोकार की पहल 'बैंड-बाजा-बिटिया' को सराहा / Image: GOEL TMT
नई दिल्ली: Band Baja Bitiya GOEL TMT Advertisement गोयल टीएमटी ने सामाजिक सरोकार को ध्यान में रखते हुए ससुराल में प्रताड़ना झेल रही बेटियों की थीम पर एक विज्ञापन ‘बैंड-बाजा-बिटिया’ जारी किया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस विज्ञापन में ‘गजराज राव’ (Gajraj Rao) का शानदार अभिनय देखने को मिला है, जिसकी हर जगह तारीफ हो रही है। वहीं, अब पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस विज्ञापन को अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है और लिखा है कि ‘हिंसा कल्चर नहीं है…ट्रेडिशन नहीं है।’
Band Baja Bitiya GOEL TMT Advertisement: स्मृति ईरानी ने गोयल टीएमटी के विज्ञापन का वीडियो अपने अधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा है कि ”कभी-कभी, एक औरत की ज़िंदगी का सबसे अहम पल यह जानना होता है कि अब उसके पास लौटने के लिए एक घर है। पीढ़ियों से, बहुत सी बेटियों को “एडजस्ट” करने, जो बर्दाश्त नहीं होता उसे सहने, अपनी इज़्ज़त की कीमत पर दिखावे को बचाने के लिए कहा गया है। हमने “थोड़ा बहुत चलता है” जैसी बातों को नॉर्मल बना दिया, बिना यह सोचे कि वे कितना नुकसान पहुंचाती हैं।”
उन्होंने आगे लिखा कि ”मैं यह साफ-साफ कह दूं, हिंसा कल्चर नहीं है…यह ट्रेडिशन नहीं है…यह मंज़ूर नहीं है। यह कभी नहीं था, यह कभी नहीं होगा। एक औरत की ताकत बहुत खास होती है। वह पालती-पोसती है, बनाती है, त्याग करती है और हर मुसीबत के सामने डटी रहती है। लेकिन ताकत को कभी भी दुख सहने का लाइसेंस नहीं समझना चाहिए। किसी भी बेटी को यह नहीं लगना चाहिए कि चुप रहना ही एकमात्र ऑप्शन है। किसी भी औरत को कभी यह नहीं मानना चाहिए कि इज्जत से समझौता किया जा सकता है।
स्मृति ने आगे लिखा कि जब परिवार बिना किसी झिझक के अपनी बेटियों के साथ खड़े होते हैं, तो वे एक जान की रक्षा करने से कहीं ज़्यादा करती हैं। वे समाज के मोरल सेंटर को बदल देती हैं। वे इज़्ज़त को फिर से डिफाइन करती हैं। वे हमें याद दिलाती हैं कि प्यार कंट्रोल नहीं है और शादी सहनशक्ति नहीं है। एक मां होने के नाते, और एक ऐसे इंसान के तौर पर जो अपनी इज़्ज़त में बहुत यकीन करती है। एम्पावरमेंट सिर्फ़ पॉलिसी से शुरू नहीं होती, यह उन घरों से शुरू होती है जो एक जैसा बनने के बजाय हिम्मत चुनते हैं। हम ऐसा बेटे पैदा करें जो औरतों का एक साथी और इंसान की तरह सम्मान करे। हम ऐसी बेटियाँ पैदा करें जो अपनी कीमत जानें और हम ऐसे परिवार बनाएं जहाँ घर वापस आना कभी हार न हो, बल्कि इज़्ज़त की बात हो।
गोयल टीएमटी के इस विज्ञापन में आप देखेंगे कि लड़की के पिता बैंड वालों के साथ जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बैंड वालों के साथ जाते हुए लड़की के पिता फ्लैश बैक पर चले जाते हैं और लोगों की नसीहते उनके जेहन में आने लगती है। बेटी अपने पिता से ससुराल वालों की ओर से किए जा रहे प्रताड़ना की जानकारी देती है, जिसे सुनकर उसके पिता परेशान हो जाते हैं। लेकिन लड़की की मां अपने पति से कहती है कि अब वही उसका घर है और अब वही उसकी किस्मत है। वीडियो में आगे देखने को मिलता है कि लड़की की दादी नसीहत देते हुए कहती है कि बेटा एक बार बच्चा हो जाए तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।
वहीं, वीडियो में आपको आगे देखने मिलेगा कि लड़की का भाई, दोस्त और परिवार के कई सदस्य लड़की के पिता को नसीहत देते हैं और कहते हैं कि ससुराल ही उसका घर है और जो उसके साथ हो रहा हे वो उसकी किस्मत है। लेकिन पिता का मन नहीं मानता और वो बारात की तरह गाजे-बाजे के साथ बेटी के ससुराल पहुंच जाते हैं। बहू के पिता को बैंड बाजे के साथ देखकर पहले तो दामाद चौक जाते हैं फिर उसके सास-ससुर पूछने लगते हैं अचानक ये क्या लेकर आ गए। फिर लड़की के पिता अपनी बेटी को घर से बाहर बुलाते हैं और गले लगाकर कहते हैं ‘ना तो पराई है…ना तो ये धन है’। इस दौरान बेटी भी अपने पिता से गले लगकर रोने लगती है। फिर पिता अपनी बेटी को गाजे-बाजे के साथ मयके ले आते हैं। लेकिन इस भावुकर कर देने वाले विज्ञापन के असली मायने आप तब समझ पाएंगे जब इसे वीडियो में देखेंगे।