Band Baja Bitiya GOEL TMT Advertisement: ‘हिंसा कल्चर नहीं है…ट्रेडिशन नहीं’ स्मृति ईरानी ने गोयल टीएमटी की सामाजिक सरोकार की पहल ‘बैंड-बाजा-बिटिया’ को सराहा, इंस्टाग्राम पर किया शेयर

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Band Baja Bitiya GOEL TMT Advertisement: 'हिंसा कल्चर नहीं है...ट्रेडिशन नहीं' स्मृति ईरानी ने गोयल टीएमटी की सामाजिक सरोकार की पहल 'बैंड-बाजा-बिटिया' को सराहा, इंस्टाग्राम पर किया शेयर

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  • Publish Date - February 20, 2026 / 04:29 PM IST,
    Updated On - February 20, 2026 / 05:28 PM IST

Band Baja Bitiya GOEL TMT Advertisement: 'हिंसा कल्चर नहीं है...ट्रेडिशन नहीं' स्मृति ईरानी ने गोयल टीएमटी की सामाजिक सरोकार की पहल 'बैंड-बाजा-बिटिया' को सराहा / Image: GOEL TMT

HIGHLIGHTS
  • "हिंसा कल्चर नहीं है... यह ट्रेडिशन नहीं है"
  • दिग्गज अभिनेता गजराज राव ने पिता की भूमिका निभाई
  • सहनशक्ति दुख सहने का 'लाइसेंस' नहीं: स्मृति ईरानी

नई दिल्ली: Band Baja Bitiya GOEL TMT Advertisement गोयल टीएमटी ने सामाजिक सरोकार को ध्यान में रखते हुए ससुराल में प्रताड़ना झेल रही बेटियों की थीम पर एक विज्ञापन ‘बैंड-बाजा-बिटिया’ जारी किया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस विज्ञापन में ‘गजराज राव’ (Gajraj Rao) का शानदार अभिनय देखने को मिला है, जिसकी हर जगह तारीफ हो रही है। वहीं, अब पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस विज्ञापन को अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है और लिखा है कि ‘हिंसा कल्चर नहीं है…ट्रेडिशन नहीं है।’

गोयल टीएमटी के विज्ञापन को स्मृति ईरानी ने सराहा (GOEL TMT Advertisement)

Band Baja Bitiya GOEL TMT Advertisement: स्मृति ईरानी ने गोयल टीएमटी के विज्ञापन का वीडियो अपने अधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा है कि ”कभी-कभी, एक औरत की ज़िंदगी का सबसे अहम पल यह जानना होता है कि अब उसके पास लौटने के लिए एक घर है। पीढ़ियों से, बहुत सी बेटियों को “एडजस्ट” करने, जो बर्दाश्त नहीं होता उसे सहने, अपनी इज़्ज़त की कीमत पर दिखावे को बचाने के लिए कहा गया है। हमने “थोड़ा बहुत चलता है” जैसी बातों को नॉर्मल बना दिया, बिना यह सोचे कि वे कितना नुकसान पहुंचाती हैं।”

हिंसा कल्चर नहीं है…यह ट्रेडिशन नहीं: Smriti Irani

उन्होंने आगे लिखा कि ”मैं यह साफ-साफ कह दूं, हिंसा कल्चर नहीं है…यह ट्रेडिशन नहीं है…यह मंज़ूर नहीं है। यह कभी नहीं था, यह कभी नहीं होगा। एक औरत की ताकत बहुत खास होती है। वह पालती-पोसती है, बनाती है, त्याग करती है और हर मुसीबत के सामने डटी रहती है। लेकिन ताकत को कभी भी दुख सहने का लाइसेंस नहीं समझना चाहिए। किसी भी बेटी को यह नहीं लगना चाहिए कि चुप रहना ही एकमात्र ऑप्शन है। किसी भी औरत को कभी यह नहीं मानना ​​चाहिए कि इज्जत से समझौता किया जा सकता है।

 

ऐसा बेटे पैदा करें जो औरतों का सम्मान करे

स्मृति ने आगे लिखा कि जब परिवार बिना किसी झिझक के अपनी बेटियों के साथ खड़े होते हैं, तो वे एक जान की रक्षा करने से कहीं ज़्यादा करती हैं। वे समाज के मोरल सेंटर को बदल देती हैं। वे इज़्ज़त को फिर से डिफाइन करती हैं। वे हमें याद दिलाती हैं कि प्यार कंट्रोल नहीं है और शादी सहनशक्ति नहीं है। एक मां होने के नाते, और एक ऐसे इंसान के तौर पर जो अपनी इज़्ज़त में बहुत यकीन करती है। एम्पावरमेंट सिर्फ़ पॉलिसी से शुरू नहीं होती, यह उन घरों से शुरू होती है जो एक जैसा बनने के बजाय हिम्मत चुनते हैं। हम ऐसा बेटे पैदा करें जो औरतों का एक साथी और इंसान की तरह सम्मान करे। हम ऐसी बेटियाँ पैदा करें जो अपनी कीमत जानें और हम ऐसे परिवार बनाएं जहाँ घर वापस आना कभी हार न हो, बल्कि इज़्ज़त की बात हो।

क्या है इस विज्ञापन में (GOEL TMT New Advertisement)

गोयल टीएमटी के इस विज्ञापन में आप देखेंगे कि लड़की के पिता बैंड वालों के साथ जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बैंड वालों के साथ जाते हुए लड़की के पिता फ्लैश बैक पर चले जाते हैं और लोगों की नसीहते उनके जेहन में आने लगती है। बेटी अपने पिता से ससुराल वालों की ओर से किए जा रहे प्रताड़ना की जानकारी देती है, जिसे सुनकर उसके पिता परेशान हो जाते हैं। लेकिन लड़की की मां अपने पति से कहती है कि अब वही उसका घर है और अब वही उसकी किस्मत है। वीडियो में आगे देखने को मिलता है कि लड़की की दादी नसीहत देते हुए कहती है कि बेटा एक बार बच्चा हो जाए तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।

वहीं, वीडियो में आपको आगे देखने मिलेगा कि लड़की का भाई, दोस्त और परिवार के कई सदस्य लड़की के पिता को नसीहत देते हैं और कहते हैं कि ससुराल ही उसका घर है और जो उसके साथ हो रहा हे वो उसकी किस्मत है। लेकिन पिता का मन नहीं मानता और वो बारात की तरह गाजे-बाजे के साथ बेटी के ससुराल पहुंच जाते हैं। बहू के पिता को बैंड बाजे के साथ देखकर पहले तो दामाद चौक जाते हैं फिर उसके सास-ससुर पूछने लगते हैं अचानक ये क्या लेकर आ गए। फिर लड़की के पिता अपनी बेटी को घर से बाहर बुलाते हैं और गले लगाकर कहते हैं ‘ना तो पराई है…ना तो ये धन है’। इस दौरान बेटी भी अपने पिता से गले लगकर रोने लगती है। फिर पिता अपनी बेटी को गाजे-बाजे के साथ मयके ले आते हैं। लेकिन इस भावुकर कर देने वाले विज्ञापन के असली मायने आप तब समझ पाएंगे जब इसे वीडियो में देखेंगे।

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इस विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य उस सामाजिक कलंक (Stigma) को मिटाना है कि बेटी अगर ससुराल से वापस आ जाए तो परिवार की 'नाक कट' जाएगी। यह संदेश देता है कि बेटी की जान और सम्मान, समाज के दिखावे से कहीं ऊपर है।

स्मृति ईरानी ने बेटों के बारे में क्या कहा?

स्मृति ईरानी ने जोर दिया कि हमें ऐसे बेटे पालने चाहिए जो महिलाओं का सम्मान एक इंसान और साथी के रूप में करें। संस्कार केवल बेटियों के लिए नहीं, बेटों के लिए भी होने चाहिए।

'एडजस्ट' करने की मानसिकता से क्या नुकसान होता है?

जब परिवार बेटी को चुपचाप सहने की सलाह देते हैं, तो इससे घरेलू हिंसा को बढ़ावा मिलता है। इससे महिलाएं मानसिक रूप से टूट जाती हैं और कई बार जानलेवा परिस्थितियों का शिकार हो जाती हैं।

विज्ञापन में 'बैंड-बाजे' का क्या महत्व है?

आमतौर पर बेटियाँ बैंड-बाजे के साथ विदा की जाती हैं। पिता का बैंड-बाजे के साथ उसे वापस लाना यह दर्शाता है कि वह अपनी बेटी को गर्व के साथ घर ला रहा है, न कि किसी बोझ या हार की तरह।

क्या यह विज्ञापन किसी ब्रांड का हिस्सा है?

हाँ, यह गोयल टीएमटी (Goyal TMT) द्वारा जारी किया गया है। ब्रांड ने लोहे की मजबूती को 'मजबूत इरादों' और 'मजबूत रिश्तों' से जोड़कर पेश किया है।