नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संकट के बीच पैकेजिंग, पोत परिवहन और बंदरगाह संचालन से जुड़ी चुनौतियों पर बृहस्पतिवार को निर्यातकों के साथ बैठकें कीं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई इन बैठकों में निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी), जिंस बोर्ड, पोत परिवहन कंपनियों और बंदरगाहों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, खासकर पश्चिम एशिया के लिए जहाजों की आवाजाही में आई बाधाओं और उनसे जुड़े समाधान पर चर्चा हुई।
उद्योग जगत ने बताया कि पेट्रोरसायन की कीमतें बढ़ने से पैकेजिंग सामग्री की लागत पिछले कुछ सप्ताह में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
निर्यातकों ने सुझाव दिया कि बंदरगाहों और अन्य एजेंसियों द्वारा दी जा रही छूट सीधे और पारदर्शी तरीके से व्यापारियों तक पहुंचाई जाए, न कि पहले शुल्क वसूला जाए और बाद में लौटाया जाए।
उन्होंने निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) की 497 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ योजना का दायरा बढ़ाकर मिस्र जैसे देशों को भी शामिल करने की मांग की, जहां जहाजरानी कंपनियों ने ‘युद्ध अधिभार’ लगा दिया है।
सरकार ने पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित निर्यातकों को सहायता देने के लिए पिछले महीने ‘निर्यात सुगमता के लिए जुझारूपन एवं लॉजिस्टिक हस्तक्षेप’ (रिलीफ) योजना शुरू की थी।
निर्यातकों ने पारादीप और विशाखापत्तनम बंदरगाहों पर बंकर सुविधा उपलब्ध कराने और विदेशी बंदरगाहों पर उतारे गए कंटेनर के लिए ‘बैक-टू-टाउन’ प्रक्रिया को आसान बनाने की भी मांग की।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय