नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े दिवाला मामलों के समाधान के लिए वित्तीय वसूली के बजाय परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) द्वारा गठित एक विशेष समिति ने सुझाव दिया है कि घर खरीदारों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए ‘परियोजना-केंद्रित दृष्टिकोण’ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित इस समिति में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल थे।
समिति ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र में दिवाला की स्थिति अन्य क्षेत्रों से अलग है, क्योंकि यहां घर खरीदारों की प्राथमिकता पैसा वापस पाने के बजाय अपने घर का निर्माण पूरा होने और उसका कब्जा प्राप्त करने पर होती है।
समिति ने रियल एस्टेट क्षेत्र के दिवाला मामलों से जुड़े 55 प्रमुख मुद्दों की समीक्षा के बाद 155 सिफारिशें की हैं। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि पूरी कंपनी को दिवालिया घोषित करने के बजाय केवल अटकी हुई परियोजना के समाधान पर ध्यान दिया जाए।
साथ ही, दिवाला संहिता (आईबीसी) और रियल एस्टेट कानून (रेरा) के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की आवश्यकता भी बताई गई है।
इन सिफारिशों का उद्देश्य परियोजनाओं के पूरा होने में होने वाली देरी को कम करना और घर खरीदारों के भरोसे को मजबूत करना है।
समिति ने यह रिपोर्ट वित्तीय संस्थानों, उद्योग प्रतिनिधियों और घर खरीदार संघों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार की है।
भाषा सुमित अजय
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