नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने नई कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना-2026 के तहत 15,000 रुपये मासिक वेतन सीमा से ऊपर के अंशदान को स्वैच्छिक कर दिया है। इसका मतलब है कि 1,800 रुपये से अधिक का अंशदान करना अब अनिवार्य नहीं होगा।
सोमवार को अधिसूचित नई ईपीएफ योजना के मुताबिक, किसी सदस्य के लिए देय अंशदान केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित वेतन सीमा के अधीन होगा।
अधिसूचना के मुताबिक, ‘‘पैरा 9 के उप-पैराग्राफ (4) के प्रावधानों के तहत, यदि किसी सदस्य का मासिक वेतन निर्धारित वेतन सीमा से अधिक है तो नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का अंशदान केवल ‘वेतन सीमा’ के आधार पर देय अंशदान तक ही सीमित रहेगा।’’
इसमें कहा गया है कि जिन मामलों में कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत उच्च वेतन पर अंशदान की अनुमति दी गई है, उनमें नियोक्ता वेतन सीमा से अधिक हिस्से पर भी पेंशन कोष में योगदान कर सकता है।
हालांकि, योजना के तहत नियोक्ता का अंशदान संबंधित कर्मचारी के वेतन का 12 प्रतिशत होगा और कर्मचारी का अंशदान भी नियोक्ता के बराबर ही रहेगा।
वर्तमान में 15,000 रुपये की वेतन सीमा पर 12 प्रतिशत की दर से अंशदान किया जाता है, जो अधिकतम 1,800 रुपये होता है। नई व्यवस्था के तहत इस सीमा से ऊपर का अंशदान कर्मचारी और नियोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा।
इसके पहले, कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952 के तहत कर्मचारी एक बार योजना में शामिल होने के बाद अपने वास्तविक मूल वेतन पर अंशदान करते थे और नियोक्ता भी उतनी ही राशि जमा करता था, भले ही वह वेतन निर्धारित सीमा से अधिक हो।
वर्ष 2014 में संशोधन के बाद कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में नियोक्ता का 8.33 प्रतिशत योगदान 15,000 रुपये की वेतन सीमा (यानी अधिकतम 1,250 रुपये प्रति माह) तक सीमित कर दिया गया था, जबकि उससे अधिक राशि ईपीएफ खाते में चली जाती थी।
नई ईपीएफ योजना में यह प्रावधान भी है कि जिन मामलों में कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत उच्च वेतन पर योगदान की अनुमति है, उनमें नियोक्ता वेतन सीमा से अधिक राशि पेंशन कोष में जमा कर सकता है।
इस बदलाव के बाद कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के पास यह विकल्प होगा कि वे वेतन सीमा तक ही अंशदान करें या वास्तविक अधिक वेतन पर स्वेच्छा से अधिक योगदान करें।
हालांकि, भविष्य निधि अंशदान में इस बदलाव पर श्रम मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी नहीं आई है।
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प्रेम अजय
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