नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एशियाई खेलों के लिए ड्रेसेज टीम के चयन से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिये बृहस्पतिवार को भारतीय ओलंपक संघ (आईओए) के सीईओ रघुराम अय्यर को अदालत में पेश होने के लिये कहा ।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायाधीश तेजस कारिया की पीठ ने यह आदेश तब दिया, जब भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) का संचालन करने वाली आईओए की तदर्थ समिति ने चुने गए खिलाड़ियों की रैंकिंग का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ नियुक्त करने का केंद्र सरकार का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
अदालत ने सीईओ को शुक्रवार को घुड़सवार अनुष अगरवाला और सुदीप्ति हजेला की अपीलों पर सुनवाई के दौरान मौजूद रहने को कहा जिन्होंने चयन में दखल से इनकार के एकल न्यायाधीश के 29 जून के फैसले को चुनौती दी है ।
अगरवाला और हजेला के वकीलों ने केंद्र के सुझाव पर सहमति जताई है ।
अदालत ने कहा कि गतिरोध को खत्म करने के लिए केंद्र का प्रस्ताव प्रथम दृष्टया ‘स्वागत योग्य कदम’ है । अदालत ने ईएफआई की तदर्थ समिति द्वारा अपीलों का गुणवत्ता के आधार पर विरोध करने के रुख पर नाराजगी जताई।
पीठ ने कहा ,‘‘ तदर्थ समिति का यह रूख । आप इसे अहम का मसला क्यो बना रहे हैं । क्या आप किसी खिलाड़ी से जुड़े हैं । नहीं । फिर क्या दिक्कत है । हम आकलन या चयन प्रक्रिया पर कुछ नहीं बोल रहे हैं ।’’
इसने चयन समिति के सदस्य और वकील कपिल मोदी की मौजूदगी पर भी कड़ा विरोध जताया । अगरवाला ने तदर्थ समिति की की ओर से उनके बीच चल रहे एक मुकदमे के कारण उन पर पक्षपात का आरोप लगाया है।
यह पूछते हुए कि क्या यह हितों का टकराव नहीं है, अदालत ने कहा कि मोदी को इस मामले में वकील के रूप में पेश नहीं होना चाहिये था ।
अदालत ने यह भी पूछा कि तीन महीने का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी तदर्थ समिति ईएफआई का कामकाज कैसे देख रही है ।
यह देखते हुए कि आईओए के पास तदर्थ समिति पर निगरानी रखने का अधिकार है, पीठ ने आदेश दिया, ‘‘हम आईओए अध्यक्ष से अनुरोध करते हैं कि वे अपने सीईओ को इस मामले में मदद के लिए अदालत में पेश होने के लिए नामांकित करें, ताकि मुद्दों का कोई सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके।’’
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