सीएसईएएम नोटिस पर मेटा के औपचारिक जवाब का इंतजार करेंगे, उसके बाद निर्णय लेंगे:आईटी सचिव

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सीएसईएएम नोटिस पर मेटा के औपचारिक जवाब का इंतजार करेंगे, उसके बाद निर्णय लेंगे:आईटी सचिव

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 01:39 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 01:39 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार इंस्टाग्राम पर सशुल्क विज्ञापनों में बाल यौन शोषण एवं दुरुपयोग सामग्री (सीएसईएएम) के मामले में मेटा को जारी नोटिस पर उसके औपचारिक जवाब का इंतजार करेगी और उसी के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

सरकार ने इस मुद्दे पर शनिवार को मेटा को नोटिस जारी किया था।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को सीएसईएएम को बढ़ावा देने तथा उस तक पहुंच आसान बनाने वाले सभी विज्ञापनों और सामग्री को हटाने का निर्देश दिया था।

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय के अधिकारियों को इंस्टाग्राम पर कथित रूप से बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के मामले में मेटा को जवाब तलब करने का निर्देश दिया था। मंत्रालय ने कंपनी से स्पष्टीकरण और इस संबंध में की गई कार्रवाई का ब्यौरा भी मांगा था।

नोटिस जारी होने के कुछ ही दिनों बाद मेटा ने एक ब्लॉग प्रकाशित कर अपने विभिन्न मंचों पर बाल यौन शोषण सामग्री से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कंपनी ने कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित पहचान प्रणाली और बड़े पैमाने पर की गई प्रवर्तन कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि वह युवाओं की सुरक्षा और विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी तथा संसाधनों में निवेश जारी रखेगी।

कंपनी ने मंगलवार को ब्लॉग में बाल शोषण को ‘‘भयावह अपराध’’ बताते हुए कहा कि वह अपने मंचों पर और उनके बाहर भी इस तरह के दुरुपयोग से हर दिन सक्रिय रूप से लड़ रही है।

‘सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट’ के इतर मंत्रालय के रुख के बारे में पूछे जाने पर कृष्णन ने कहा, ‘‘ हम अपने जारी किए गए नोटिस पर औपचारिक जवाब का इंतजार करेंगे और उसके बाद जवाब के आधार पर अपना रुख तय करेंगे।’’

सरकार की यह नियामकीय जांच बीबीसी की उस रिपोर्ट के बाद सामने आई है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मेटा का अनुशंसित एल्गोरिद्म बाल यौन शोषण सामग्री वाले वीडियो को बढ़ावा दे रहा था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर हुईं।

बीबीसी की जांच में यह भी कथित तौर पर पाया गया कि मेटा की विज्ञापन नीतियों में नग्नता और यौन रूप से स्पष्ट सामग्री पर रोक होने के बावजूद फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन दिखाई दे रहे थे।

आरोप है कि इंस्टाग्राम पर ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों वाले सशुल्क विज्ञापन दिखाए गए, जो उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम चैनल तक ले जाते थे, जहां कथित तौर पर ऐसी सामग्री बेची जा रही थी।

मंगलवार को प्रकाशित ब्लॉग में मेटा ने कहा कि उसकी विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया में नीति का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों की पहचान कर उन्हें हटाने के लिए स्वचालित प्रणालियों और मानव समीक्षकों दोनों का उपयोग किया जाता है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि कोई भी प्रणाली हर उल्लंघन को पकड़ने में सक्षम नहीं होती।

कंपनी के अनुसार, विज्ञापनों की जांच उन्हें प्रकाशित करने से पहले की जाती है और बाद में भी उनकी लगातार समीक्षा एवं पुनः समीक्षा होती रहती है। उपयोगकर्ता भी संदिग्ध उल्लंघनों की रिपोर्ट कर सकते हैं।

मेटा ने कहा, ‘‘ यह काम लगातार जारी है। हमारी टीमें नई प्रौद्योगिकी विकसित कर, नियमों का उल्लंघन करने वाले लिंक को अवरुद्ध कर और पूरे उद्योग के साथ सूचनाएं साझा कर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लगातार बेहतर बना रही हैं। हमें पता है कि अभी और काम किया जाना बाकी है। हम युवाओं की सुरक्षा, अपनी विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करने और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ काम करने हेतु आवश्यक सभी संसाधनों में निवेश जारी रखेंगे।’’

मेटा ने अपनी विभिन्न सेवाओं पर बाल शोषण से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। इनमें एआई आधारित पहचान प्रणाली, बाल नग्नता, शोषण और दुरुपयोग के खिलाफ स्पष्ट नीतियां तथा बड़े पैमाने पर की गई प्रवर्तन कार्रवाई शामिल हैं।

कंपनी ने कहा, ‘‘ हम भारत में इंस्टाग्राम विज्ञापनों से जुड़ी हालिया खबरों से अवगत हैं, जिनमें हमारी बाल शोषण विरोधी नीतियों का उल्लंघन हुआ। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं, अपने मंचों पर ऐसी सामग्री बिल्कुल नहीं चाहते और इससे निपटने के अपने प्रयासों को और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

मेटा ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि वह अनुचित रुचि रखने वाले लोगों को जानबूझकर बच्चों से जुड़े विज्ञापन दिखाता है।

कंपनी ने कहा, ‘‘ इसके बिल्कुल विपरीत, हम ऐसी प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं जो बच्चों से संबंधित संभावित संदिग्ध गतिविधि दिखाने वाले खातों की पहचान करती है और पिछले वर्ष हमने ऐसे 40 लाख से अधिक संदिग्ध खातों को स्वतः हटा दिया।’’

मेटा ने कहा कि उसने बाल शोषण के खिलाफ एआई आधारित कार्रवाई को और मजबूत किया है और उसकी नई प्रणालियां अब ऑनलाइन आबादी के 98 प्रतिशत लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं को कवर करती हैं।

कंपनी के अनुसार, पिछले वर्ष उसने वैश्विक स्तर पर 40 लाख से अधिक संदिग्ध खाते और बाल शोषण से जुड़ी 3.6 करोड़ सामग्री हटाई। भारत में पिछले छह महीनों के दौरान एआई उपकरणों की मदद से शोषण संबंधी संदिग्ध लिंक साझा करने वाले 1.60 लाख खातों को हटाया गया।

कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क स्थित इस प्रौद्योगिकी कंपनी के स्वामित्व में फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे मंच हैं।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा