सीएसआईआर-आईएमएमटी गठजोड़ विकसित करेगा भारत का पहला पूरी तरह हाइड्रोजन आधारित डीआरआई संयंत्र

सीएसआईआर-आईएमएमटी गठजोड़ विकसित करेगा भारत का पहला पूरी तरह हाइड्रोजन आधारित डीआरआई संयंत्र

सीएसआईआर-आईएमएमटी गठजोड़ विकसित करेगा भारत का पहला पूरी तरह हाइड्रोजन आधारित डीआरआई संयंत्र
Modified Date: September 13, 2026 / 01:34 pm IST
Published Date: September 13, 2026 1:34 pm IST

कोलकाता, 12 सितंबर (भाषा) इस्पात क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए सीएसआईआर- खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएमएमटी) पूरी तरह हाइड्रोजन से चलने वाले भारत के पहले डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) संयंत्र को विकसित करने के लिए 207 करोड़ रुपये की एक राष्ट्रीय पायलट परियोजना का नेतृत्व करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

प्रतिदिन 20 टन क्षमता वाली इस प्रायोगिक परियोजना को इस्पात मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।

इस परियोजना को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 113 करोड़ रुपये की सरकारी सहायता मिलेगी, जबकि बाकी राशि गठजोड़ के साझेदारों द्वारा जुटाई जाएगी।

सीएसआईआर-आईएमएमटी के निदेशक रामानुज नारायण ने पीटीआई-भाषा को बताया कि यह संयंत्र अगस्त, 2029 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है। यह भारतीय परिस्थितियों, विशेष रूप से घरेलू लौह अयस्क के उपयोग के अनुकूल हाइड्रोजन आधारित डीआरआई प्रौद्योगिकी को विकसित करने पर केंद्रित होगा।

सीएसआईआर-आईएमएमटी के नेतृत्व वाले इस गठजोड़ में गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड, लॉयड स्टील, जिंदल स्टेनलेस और थाइसेनक्रुप इंडस्ट्रीज इंडिया शामिल हैं।

सीएसआईआर-आईएमएमटी के खनिज प्रसंस्करण प्रभाग के प्रमुख एवं वैज्ञानिक पी सी बेउरिया ने बताया कि टाटा स्टील भी इस गठजोड़ में शामिल होने पर सहमत हो गई है, और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) सहित अन्य प्रमुख इस्पात उत्पादकों को परियोजना में जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रभाग के मुख्य वैज्ञानिक एस पी दास ने कहा कि कुछ निजी इस्पात निर्माता वर्तमान में हाइड्रोजन के आंशिक उपयोग वाली परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिनकी योजना धीरे-धीरे इसकी हिस्सेदारी बढ़ाने की है।

उन्होंने कहा, ”इसके विपरीत, सीएसआईआर परियोजना शत-प्रतिशत हाइड्रोजन आधारित डीआरआई संयंत्र पर ध्यान केंद्रित कर रही है।”

प्रस्तावित संयंत्र में एक वर्टिकल शाफ्ट भट्टी का उपयोग किया जाएगा, जिसे पूरी तरह से हाइड्रोजन पर संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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