नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) भारत में डेटा सेंटर की स्थापित क्षमता 2030 में करीब तीन गुना होकर पांच-छह गीगावाट हो सकती है। बाजार शोध कंपनी रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स ने बृहस्पतिवार को यह अनुमान जताया है।
भारत में डेटा सेंटर की स्थापित क्षमता वर्तमान में करीब 1.65 गीगावाट है।
रेडसीर की रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर की मांग बढ़ने के पीछे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) तथा बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के क्षेत्रीय नियमों के तहत डेटा को स्थानीय स्तर पर रखने की जरूरत, बढ़ती डेटा खपत और कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े कामकाज प्रमुख कारण हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने की लागत भी अपेक्षाकृत कम है और यह करीब 80 लाख डॉलर प्रति मेगावाट है।
रेडसीर की ‘इंडिया डेटा सेंटर्स’ रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘2025 में डेटा सेंटर की स्थापित क्षमता करीब 1.65 गीगावाट थी, जिसके 2030 तक पांच-छह गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। यह 2020 से दशक के दौरान 27-32 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक पांच-छह गीगावाट की आईटी लोड क्षमता का मतलब करीब सात से नौ गीगावाट बिजली ग्रिड से लेने की जरूरत होगी। इसके लिए करीब पांच गीगावाट अतिरिक्त ग्रिड क्षमता को सुरक्षित, अनुबंधित और चालू करने की जरूरत होगी, जबकि मौजूदा स्तर करीब 2.7 गीगावाट का है।
देश में स्थापित डेटा सेंटर क्षमता में मुंबई की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है। मुंबई और चेन्नई मिलकर करीब 66 प्रतिशत क्षमता रखते हैं।
भाषा यासिर अजय
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