सतर्क संदेश के साथ दावोस बैठक संपन्न, भारत ने दिखाई उम्मीद की किरण
सतर्क संदेश के साथ दावोस बैठक संपन्न, भारत ने दिखाई उम्मीद की किरण
(बरुण झा)
दावोस, 23 जनवरी (भाषा) विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की पांच दिवसीय वार्षिक बैठक शुक्रवार को दावोस में संपन्न हुई। बैठक का समापन दुनिया में बढ़ते संघर्षों, संरक्षणवाद, बढ़ते सरकारी कर्ज, गलत सूचनाओं, घटते भरोसे, एआई के जोखिमों और आर्थिक सुस्ती के प्रति चेतावनी के साथ हुआ।
इन सबके बीच भारत ने उम्मीद की एक किरण जगाई। भारत के राजनीतिक और कारोबारी दिग्गजों ने दुनिया के सामने भारत में और भारत के साथ व्यापार करने का पुरजोर पक्ष रखा।
इस सम्मेलन में 64 देशों के राष्ट्राध्यक्षों या शासनाध्यक्षों ने भाग लिया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने जाने-पहचाने अंदाज में लगभग हर किसी की आलोचना करते हुए सुर्खियों में छाए रहे। दूसरे देशों के नेताओं ने भी पलटवार किया, हालांकि उनमें से अधिकांश का लहजा विनम्र था।
ट्रंप गाजा और यूक्रेन के लिए अपनी शांति योजनाओं पर कुछ प्रगति करते नजर आए। उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की और इसे एक अच्छी बैठक बताया। साथ ही, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पास एक दूत भेजकर यह संदेश दिया कि युद्ध अब समाप्त होना चाहिए।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बारे में ट्रंप ने कहा कि मोदी उनके दोस्त हैं और जल्द ही एक ”अच्छा समझौता” होगा।
भारत के कम से कम दस राज्यों ने निवेश के लिए अपनी प्रदर्शनी लगाई और करोड़ों रुपये के निवेश प्रतिबद्धताओं की घोषणा की। हालांकि, कुछ राज्यों ने आंकड़ों की घोषणा करने से परहेज किया, क्योंकि अक्सर यह सवाल उठते रहे हैं कि विदेशी धरती पर हस्ताक्षरित इन समझौता ज्ञापनों (एमओयू) में कितने वास्तव में धरातल पर उतरते हैं।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ व्यापारिक और सरकारी नेताओं ने कहा कि ये आंकड़े अक्सर सुर्खियां बटोरने और बड़े राज्य प्रतिनिधिमंडलों द्वारा किए गए भारी खर्च को सही ठहराने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते हैं।
सकारात्मक पक्ष यह रहा कि भारत की वृद्धि गाथा मजबूत बनी रही और कई विदेशी नेताओं ने भारत और वहां व्यापार की संभावनाओं पर गहरा भरोसा जताया। सत्ताधारी एनडीए गठबंधन से जुड़े भारतीय नेताओं ने इसका श्रेय सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत नेतृत्व और आर्थिक नीतियों को दिया, जबकि अन्य ने इसे देश और इसकी अर्थव्यवस्था की आंतरिक शक्ति बताया।
आयोजक विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने कहा कि दशकों की सबसे जटिल भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि में आयोजित यह बैठक दुनिया के सामने मौजूद सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर प्रगति करने और संवाद के लिए एक आवश्यक मंच साबित हुई।
डब्ल्यूईएफ के अध्यक्ष और सीईओ बोर्गे ब्रेंडे ने समापन सत्र में कहा, ”यह अनिश्चितता का वक्त है, लेकिन संभावनाओं का भी है। यह पीछे हटने का नहीं, बल्कि एकजुट होने का वक्त है।”
भाषा पाण्डेय रमण
रमण


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