नयी दिल्ली, दो मई (भाषा) वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से उन विदेशी कंपनियों को फेमा के तहत स्वचालित मार्ग से भारत में निवेश करने की अनुमति देने के फैसले को अधिसूचित किया है, जिनमें चीन की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च में डीपीआईआईटी के 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधनों को मंजूरी दी थी। इन संशोधनों के अनुसार, जिन विदेशी कंपनियों में चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, वे उन क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग के तहत भारत में निवेश कर सकती हैं, जहां एफडीआई की अनुमति है, जो क्षेत्रीय शर्तों के अधीन होगा।
हालांकि, यह रियायत चीन, हांगकांग या भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत कंपनियों पर लागू नहीं होगी।
मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने मार्च में प्रेस नोट 2 (2026 श्रृंखला) के माध्यम से इसे अधिसूचित किया था।
आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) की अधिसूचना के अनुसार, ‘लाभकारी स्वामी’ अभिव्यक्ति का वही अर्थ होगा जो धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 2 की उप-धारा (1) के खंड (एफए) में दिया गया है। पीएमएलए नियम के अनुसार नियंत्रणकारी स्वामित्व हित का अर्थ कंपनी के 10 प्रतिशत से अधिक शेयरों या पूंजी या लाभ पर स्वामित्व या पात्रता से है।
अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में आए कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में केवल 0.32 प्रतिशत हिस्सेदारी (2.51 अरब अमेरिकी डॉलर) के साथ चीन 23वें स्थान पर है।
भाषा पाण्डेय
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