बुनियादी ढांचा क्षेत्र की वजह से बढ़ रही है इस्पात, लौह अयस्क की मांग : प्रमोद सावंत

बुनियादी ढांचा क्षेत्र की वजह से बढ़ रही है इस्पात, लौह अयस्क की मांग : प्रमोद सावंत

बुनियादी ढांचा क्षेत्र की वजह से बढ़ रही है इस्पात, लौह अयस्क की मांग : प्रमोद सावंत
Modified Date: May 19, 2026 / 02:51 pm IST
Published Date: May 19, 2026 2:51 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

पणजी, 19 मई (भाषा) गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने मंगलवार को कहा कि भारत इस समय बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विस्तार के अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है, जिससे इस्पात एवं लौह अयस्क की मांग तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने साथ ही लौह अयस्क खनन क्षेत्र में मूल्य संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उत्तर गोवा के अर्पोरा में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय लौह अयस्क सम्मेलन 2.0’ को संबोधित करते हुए सावंत ने कहा कि यह मंच नीति-निर्माण, बाजार संबंधी जानकारी और इस्पात व खनन क्षेत्र में उद्योग भागीदारी के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब भारत का बुनियादी ढांचा एवं विनिर्माण क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है तब सरकार, खनन कंपनियों, लॉजिस्टिक्स से जुड़े पक्षों, इस्पात निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना अत्यंत आवश्यक है।

सावंत ने इस पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्र में महिला-नेतृत्व वाले संगठनों की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया और इसे भारत के औद्योगिक नेतृत्व के बदलते स्वरूप का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचा विकास, औद्योगिक वृद्धि, लॉजिस्टिक्स दक्षता और विनिर्माण उत्कृष्टता को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने कहा कि राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, मेट्रो रेल, औद्योगिक गलियारे, नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी विकास और रक्षा विनिर्माण में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है।

सावंत ने कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है और 2030 तक 30 करोड़ टन उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है। लौह अयस्क क्षेत्र औद्योगिक विकास की रीढ़ बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक खनन और इस्पात उद्योग में बड़े बदलाव हो रहे हैं जहां मूल्य संवर्धन, स्थिरता, कुशल लॉजिस्टिक्स और पर्यावरण-अनुकूल खनन पर जोर बढ़ रहा है।

गोवा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य का लौह अयस्क खनन से पुराना संबंध रहा है जिसने रोजगार, निर्यात, परिवहन और बंदरगाह गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। हालांकि, अतीत में खनन गतिविधियों के निलंबन से राज्य की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा था और हजारों लोगों को रोजगार व आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि सरकार ने पारदर्शी, कानूनी और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ तरीके से खनन क्षेत्र को फिर खड़ा करने के प्रयास किए हैं। खनन ब्लॉक की नीलामी का पहला चरण पूरा हो चुका है और लगभग 18 ब्लॉक में संचालन फिर शुरू हो गया है जिसकी अनुमानित उत्पादन क्षमता करीब 1.9 करोड़ टन प्रति वर्ष है।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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