शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के लिए डीजल वाहनों को हटाना होगाः नीति आयोग रिपोर्ट
शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के लिए डीजल वाहनों को हटाना होगाः नीति आयोग रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) नीति आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य पाने की दिशा में परिवहन क्षेत्र की भूमिका अहम होगी और इसकी शुरुआत डीजल वाहनों को चरणबद्ध ढंग से हटाने और सीएनजी, हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से होनी चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवहन क्षेत्र में बदलाव के अगले चरण में एथनॉल-मिश्रित ईंधन पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों, उच्च बायो-सीएनजी मिश्रण और हाइब्रिड फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके साथ इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का विस्तार जारी रहना चाहिए।
नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि परिवहन क्षेत्र में बदलाव के अंतिम चरण में ईवी, हाइड्रोजन आधारित और संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) आधारित वाहनों जैसे शून्य-उत्सर्जन विकल्पों का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कम उत्सर्जन वाली वाहन प्रौद्योगिकियों का मूल्यांकन केवल वाहन से निकलने वाले धुआं के आधार पर नहीं, बल्कि उनके समूचे जीवन-चक्र (निर्माण, ईंधन/बिजली उत्पादन, उपयोग और निस्तारण) को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में बैटरी-चालित ईवी के उत्पादन चरण में होने वाले व्यापक उत्सर्जन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि हाइब्रिड वाहन मौजूदा भारतीय ग्रिड परिस्थितियों में अक्सर बैटरी ईवी को पीछे छोड़ देते हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर और ऊर्जा एवं पर्यावरण शोध संस्था टेरी के अध्ययनों के हवाले से कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में बैटरी-चालित ईवी को प्रारंभिक उत्सर्जन की भरपाई के लिए 1.5 से 2 लाख किलोमीटर तक चलाना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में परिवहन क्षेत्र का देश के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 10 प्रतिशत और ऊर्जा खपत में 20 प्रतिशत हिस्सा था।
नीति आयोग की रिपोर्ट में वाहन दक्षता संबंधी कैफे मानकों को कड़ा करने, भारत चरण मानकों को वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाने और पुराने वाणिज्यिक वाहनों को हटाने जैसे कदमों की भी अनुशंसा की गई है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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