छतों पर सौर प्रणाली लगाने का लक्ष्य हासिल करने में वितरण कंपनियां महत्वपूर्ण: संसदीय समिति

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छतों पर सौर प्रणाली लगाने का लक्ष्य हासिल करने में वितरण कंपनियां महत्वपूर्ण: संसदीय समिति

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  • Publish Date - March 12, 2026 / 06:46 PM IST,
    Updated On - March 12, 2026 / 06:46 PM IST

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत एक करोड़ घरों की छत पर सौर प्रणाली लगाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पोर्टल के बुनियादी ढांचे और आंकड़ा सत्यापन को मजबूत करने और बिजली वितरण कंपनियों को इस योजना में शामिल करना महत्वपूर्ण है। संसद की एक समिति ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही।

फरवरी, 2024 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य मार्च, 2027 तक एक करोड़ घरों को उनकी छतों पर सौर प्रणाली (रूफटॉप सोलर) लगाकर सालाना 75,000 करोड़ रुपये की बचत कराना है।

संसद में पेश की गई नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की अनुदान मांग (2026-27) पर समिति की 12वीं रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 61 लाख के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 23.29 लाख छतों पर सौर प्रणाली लगाई गई। इससे 28,100 करोड़ रुपये के संशोधित आवंटन में से 22,402.97 करोड़ रुपये की राशि का 80 प्रतिशत उपयोग हुआ।

समिति ने पहले की सिफारिश को दोहराते हुए कहा कि जब तक वितरण कंपनियां पूरी तरह से इसमें शामिल नहीं होंगी, तब तक पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजीएमबीवाई) के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना मुश्किल होगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पीएमएसजीएमबीवाई के तहत पोर्टल के बुनियादी ढांचे और आंकड़ा सत्यापन प्रणालियों को मजबूत करना जरूरी है।

इसमें एक नई लघु जल विद्युत योजना की आवश्यकता भी बतायी गयी है। मंत्रालय 2017 से कोई भी ऐसी योजना शुरू नहीं कर पाया है।

इसके अलावा, समिति ने यह भी पाया कि पूर्वोत्तर राज्यों में जलविद्युत के प्रचुर स्रोतों के कारण लघु जल विद्युत की काफी संभावनाएं हैं।

समिति ने कहा कि इससे मंत्रालय को पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपने बजट के उपयोग में सुधार करने का अवसर भी है। इन क्षेत्रों में आवंटित राशि का केवल 10 प्रतिशत ही खर्च किया गया है।

अंतर-राज्यीय हरित ऊर्जा गलियारे (जीईसी) के तीसरे चरण की शुरुआत के संबंध में, समिति ने चरण एक और दो के विपरीत, इसके समय पर कार्यान्वयन की उम्मीद जताई। मंत्रालय से आग्रह किया गया है कि वह राज्यों को मार्ग के अधिकार (आरओडब्ल्यू) और भूमि अधिग्रहण संबंधी मुआवजे पर केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करे, जिससे निविदा प्रक्रिया में लगने वाला समय और अनावश्यक अदालती मामले कम होने की उम्मीद है।

भाषा रमण अजय

अजय