सरकार ने वोडाफोन आइडिया की एजीआर देनदारी 27 प्रतिशत घटाकर 64,046 करोड़ रुपये की

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सरकार ने वोडाफोन आइडिया की एजीआर देनदारी 27 प्रतिशत घटाकर 64,046 करोड़ रुपये की

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  • Publish Date - April 30, 2026 / 09:47 PM IST,
    Updated On - April 30, 2026 / 09:47 PM IST

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) सरकार ने कर्ज में डूबी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया को राहत देते हुए उसकी समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) देनदारी करीब 27 प्रतिशत घटाकर 64,046 करोड़ रुपये कर दी है। इसके साथ बकाया भुगतान पर पांच वर्ष की मोहलत भी दी गई है।

कंपनी ने बृहस्पतिवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, ‘दूरसंचार विभाग ने 30 अप्रैल, 2026 के अपने संचार में सूचित किया है कि इस उद्देश्य के लिए गठित समिति ने 31 दिसंबर 2025 तक एजीआर बकाये को 64,046 करोड़ रुपये पर अंतिम रूप दे दिया है।’

इससे पहले दूरसंचार विभाग ने 31 दिसंबर, 2025 तक एजीआर देनदारी 87,695 करोड़ रुपये तय की थी। हालांकि इस देनदारी को बाद में पुनर्मूल्यांकन के अधीन रखा गया था।

नियामकीय सूचना के मुताबिक, वोडाफोन आइडिया को अंतिम बकाया राशि 10 वर्षों की अवधि में दो चरणों में चुकानी होगी।

इसके तहत वित्त वर्ष 2031-32 से 2034-35 तक चार वर्षों में हर साल न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। शेष राशि वित्त वर्ष 2035-36 से 2040-41 के दौरान छह समान वार्षिक किस्तों में देनी होगी, जो प्रति वर्ष लगभग 10,608 करोड़ रुपये होगी।

इसके अलावा, कंपनी को वित्त वर्ष 2018 और 2019 से संबंधित एजीआर बकाये के लिए मार्च 2026 से मार्च 2031 तक हर साल 124 करोड़ रुपये का अलग से भुगतान करना होगा। यह इस पुनर्मूल्यांकन का हिस्सा नहीं है।

एजीआर दूरसंचार कंपनियों की वह समायोजित आय है जिसके आधार पर उन्हें सरकार को लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का भुगतान करना होता है। इसकी बकाया देनदारी को लेकर वोडाफोन आइडिया की सरकार के साथ लंबे समय से चर्चा चल रही थी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 दिसंबर, 2025 को वोडाफोन आइडिया के एजीआर बकाये को स्थिर करते हुए पांच वर्ष की मोहलत देने का निर्णय लिया था। यह कदम उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद उठाया गया था जिसमें सरकार को अतिरिक्त एजीआर मांग पर पुनर्विचार करने और बकाये का समग्र पुनर्मूल्यांकन करने की अनुमति दी गई थी।

सरकार के इस राहत पैकेज का उद्देश्य क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना, केंद्र के बकाये की व्यवस्थित वसूली सुनिश्चित करना और कंपनी में लगभग 48.9 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले सरकारी हितों के साथ करीब 20 करोड़ उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा करना है।

भारी कर्ज, कड़ी प्रतिस्पर्धा और बढ़ते एजीआर बकाये के कारण वोडाफोन आइडिया लंबे समय से भारी वित्तीय दबाव से गुजर रही है।

कंपनी को वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में 17,418 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि उसकी कुल देनदारी 2.09 लाख करोड़ रुपये रही।

हालांकि, ग्राहक आधार में गिरावट का सामना कर रही कंपनी के ग्राहकों की संख्या हाल के महीनों में सुधरी है। दूरसंचार विनियामक ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में कंपनी ने एक लाख से अधिक नए मोबाइल ग्राहक जोड़े हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण