नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) सरकार 10 प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को भारत में स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति देने संबंधी नियमों को जल्द ही विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत अधिसूचित करेगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद ये बदलाव प्रभावी हो जाएंगे।
इससे पहले मार्च में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के 2020 में जारी प्रेस नोट-3 में संशोधन को मंजूरी दी थी।
संशोधित प्रावधानों के तहत, ऐसी विदेशी कंपनियां जिनमें चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, उन क्षेत्रों में निवेश कर सकेंगी जहां प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की स्वचालित मार्ग से अनुमति है।
हालांकि, यह रियायत चीन, हांगकांग या भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत कंपनियों पर लागू नहीं होगी।
सरकार ने यह निर्णय भी लिया है कि पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पॉलीसिलिकॉन और इंगोट-वेफर जैसे क्षेत्रों में आने वाले एफडीआई प्रस्तावों का निपटारा 60 दिनों के भीतर किया जाएगा। इन क्षेत्रों को मंत्रिमंडलीय सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति द्वारा चिह्नित किया जाएगा।
डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे ने कहा कि आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) को फेमा के तहत अधिसूचना जारी करनी है, जो जल्द ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कुछ तकनीकी बारीकियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
शिवहरे ने यह भी बताया कि डीपीआईआईटी ऐसे उप-क्षेत्रों की पहचान कर रहा है, जिनमें आवेदन 60 दिनों के भीतर निपटाए जाएंगे। साथ ही प्रेस नोट-3 के तहत लंबित पुराने आवेदनों की भी समीक्षा की जा रही है, जिन्हें संभवतः सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि देश में कुल एफडीआई अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान बढ़कर 88.29 अरब डॉलर हो गया जो 2024-25 की समान अवधि में 80.61 अरब डॉलर था।
देश में शुद्ध एफडीआई भी बढ़कर 6.26 अरब डॉलर हो गया जो 2024-25 में 95.9 करोड़ डॉलर था।
डीपीआईआईटी के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि समूचे वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 90 अरब डॉलर के पार पहुंच जाने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि सुधारात्मक उपाय, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और तेजी से बढ़ती आर्थिक वृद्धि देश को अच्छा निवेश आकर्षित करने में मदद कर रही है।
सरकार ने साथ ही बताया कि इन्वेस्ट इंडिया ने 2025-26 के दौरान 6.1 अरब डॉलर से अधिक के 60 परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में सहायता की जिससे 31,000 से अधिक संभावित रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
इन निवेशों में लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय देशों से आया है जबकि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों की भागीदारी भी बनी हुई है।
ब्राजील, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे उभरते स्रोत देशों से निवेश आने से देश के निवेश आधार में विविधता दिखाई दे रही है।
‘इन्वेस्ट इंडिया’ की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) निवृत्ति राय ने कहा कि रसायन, दवा, जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में लगभग 65 प्रतिशत निवेश हुआ जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, वैमानिकी एवं रक्षा तथा मोटर वाहन/ इलेक्ट्रिक वाहन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय गतिविधि देखी गई है।
उन्होंने कहा कि एजेंसी अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए 11 देशों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण