नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) सरकार की नई मूल्य स्थिरीकरण योजना के तहत घरेलू एयरलाइंस को अधिकतम तीन वर्षों तक 86.32 रुपये प्रति लीटर के तय आधार मूल्य पर विमानन ईंधन (एटीएफ) उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वैश्विक ईंधन कीमतों में उछाल का असर कम करने में मदद मिलेगी।
हालांकि हवाई अड्डा शुल्क, मार्जिन एवं लागू कर जोड़ने के बाद दिल्ली में एटीएफ की प्रभावी बिक्री कीमत करीब 115 रुपये प्रति लीटर बैठती है।
सरकारी अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस स्वैच्छिक योजना का हिस्सा बनने वाली एयरलाइंस को एटीएफ की प्रभावी कीमत दिल्ली में करीब 115 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 114.5 रुपये और चेन्नई में लगभग 139 रुपये प्रति लीटर पड़ेगी। इसमें फ्री-ऑन-बोर्ड (एफओबी) आधार मूल्य के साथ हवाई अड्डा शुल्क, तेल कंपनियों का मार्जिन एवं लागू कर शामिल हैं।
एटीएफ की यह दर दिल्ली में करीब 105 रुपये प्रति लीटर के मौजूदा स्तर से अधिक है, जिसे पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच दो महीने से नियंत्रित रखा गया था।
योजना में शामिल एयरलाइंस एटीएफ की तय कीमत चुकाएंगी, जबकि इसमें शामिल नहीं होने वाली एयरलाइंस से मौजूदा अंतरराष्ट्रीय दर पर शुल्क लिया जाएगा, जो फिलहाल करीब 142 रुपये प्रति लीटर है।
यह योजना केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा एयरलाइंस के लिए स्वीकृत 10,000 करोड़ रुपये के ईंधन मूल्य स्थिरीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत तेल विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त कर्ज दिया जाएगा ताकि वे एयरलाइंस को तय कीमत पर एटीएफ की आपूर्ति कर सकें।
नागर विमानन मंत्रालय के निदेशक रोहित राज ने बताया कि घरेलू परिचालन के लिए एफओबी स्तर पर 86.32 रुपये प्रति लीटर और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए 104.49 रुपये प्रति लीटर का आधार मूल्य तय किया गया है।
हालांकि हवाई अड्डा शुल्क, मार्जिन एवं लागू कर जोड़ने के बाद दिल्ली में एटीएफ की प्रभावी बिक्री कीमत घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय दोनों परिचालनों के लिए करीब 115 रुपये प्रति लीटर बैठती है।
उन्होंने कहा कि यह नई व्यवस्था साल की शुरुआत में पश्चिम एशिया संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय एटीएफ कीमतों में तेज उछाल के चलते लागू की गई अस्थायी ईंधन मूल्य-सीमा व्यवस्था की जगह लेती है।
एटीएफ की एयरलाइंस की परिचालन लागत में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है और अस्थिरता के दौर में यह 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ानों के मार्ग लंबे होने से भी लागत पर दबाव बढ़ा है।
सरकार का कहना है कि इस योजना से एयरलाइंस को ईंधन लागत में स्थिरता मिलेगी, जिससे वे अपने परिचालन की बेहतर योजना बना सकेंगी और यात्री किराया अचानक बढ़ने का दबाव कम होगा।
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प्रेम रमण
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