अल नीनो से देश में चावल और मक्का उत्पादन प्रभावित होगा :एफएओ

अल नीनो से देश में चावल और मक्का उत्पादन प्रभावित होगा :एफएओ

अल नीनो से देश में चावल और मक्का उत्पादन प्रभावित होगा :एफएओ
Modified Date: June 15, 2026 / 09:22 pm IST
Published Date: June 15, 2026 9:22 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) नया अल नीनो चरण आधिकारिक तौर पर शुरू होने के साथ खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने चेतावनी दी है कि यह भारत के ग्रीष्मकालीन मानसून को कमजोर कर सकता है, जिससे महत्वपूर्ण खरीफ सत्र के दौरान चावल और मक्का सहित वर्षा आधारित फसलें दबाव में आ सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र निकाय ने कहा कि मौसम की यह परिघटना उन क्षेत्रों में कृषि पर निर्भर आजीविका और खाद्य सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ाती है, जो पहले से ही संकटग्रस्त हैं।

एफएओ ने अपनी वेबसाइट पर कहा, ‘‘एशिया में इसका खतरा सिर्फ खेतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वैश्विक बाजारों तक फैला हुआ है। अल नीनो भारत के अधिकतर हिस्सों में ग्रीष्मकालीन मानसून को कमजोर कर सकता है, जिससे चावल और मक्का जैसी वर्षा आधारित फसलें प्रभावित हो सकती हैं।’’

इसमें कहा गया है कि कृषि सूखे का खतरा पूरे दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में है।

यह चेतावनी ऐसे समय में जारी की गई है जब विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने सामान्य से अधिक मजबूत मानसून चक्र की भविष्यवाणी की है। एफएओ का विश्लेषण 41 साल की ऐतिहासिक उपग्रहीय चित्रों पर आधारित है।

भारत पर प्रभाव एक विशेष चिंता का विषय है और 2015-16 में अल नीनो के दौरान भारत के मक्का उत्पादन में चार प्रतिशत तथा चावल के उत्पादन में एक प्रतिशत की गिरावट आई थी।

पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में इसी घटना के कारण लगभग 1.5 करोड़ टन चावल का नुकसान हुआ, जिससे कीमतें बढ़ गईं और आयात पर निर्भर देशों पर दबाव पड़ा।

एफएओ के प्राकृतिक संसाधन अधिकारी जॉर्ज अलवर-बेलट्रान ने कहा, ‘‘जब बारिश कम होती है, तो सबसे पहले कृषि प्रभावित होती है। एक किसान पहले फसल खो सकता है, फिर पशुधन और इसके साथ ही अपनी पूरी आजीविका खो सकता है।’’

एजेंसी ने आगाह किया कि यह चक्र, पिछले चक्रों की तुलना में अधिक हानिकारक साबित हो सकता है।

भाषा राजेश राजेश यासिर अजय

अजय


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