सेमीकॉन 2.0 के तहत इक्विटी नियमों से अत्याधुनिक चिप डिजाइन के लिए निवेश मिलेगा : आईटी सचिव

सेमीकॉन 2.0 के तहत इक्विटी नियमों से अत्याधुनिक चिप डिजाइन के लिए निवेश मिलेगा : आईटी सचिव

सेमीकॉन 2.0 के तहत इक्विटी नियमों से अत्याधुनिक चिप डिजाइन के लिए निवेश मिलेगा : आईटी सचिव
Modified Date: July 19, 2026 / 10:13 am IST
Published Date: July 19, 2026 10:13 am IST

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार के 1.27 लाख करोड़ रुपये के सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम के तहत भारतीय कंपनियों को उन्नत सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन के लिए अनुदान के साथ-साथ इक्विटी के रूप में भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे कृत्रिम मेधा (एआई) जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक उन्नत चिप विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया जा सकेगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह बात कही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) के सचिव एस. कृष्णन ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि कि उन्नत चिप डिजाइन के लिए हजारों करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि पहले की डिजाइन-से जुड़ी प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के तहत अधिकतम 15 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलती थी, जबकि अत्याधुनिक चिप डिजाइन करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जरूरत पड़ सकती है। ‘‘हम अधिक वित्तपोषण उपलब्ध कराने की मंशा रखते हैं।’’

कृष्णन ने कहा कि इसके साथ ही सरकार पूरी राशि खुद उपलब्ध नहीं करा सकती। इसलिए सेमीकॉन 2.0 के तहत ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिसमें उद्यम पूंजी निवेशकों या अन्य निवेशकों के साथ सरकार भी सह-निवेश करेगी। उन्होंने कहा कि इससे एक ओर परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कुल पूंजी बढ़ेगी और दूसरी ओर कंपनियों के चयन का काम बाजार आधारित निवेशकों के जरिये होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार उन मान्यता प्राप्त उद्यम पूंजी कोषों के साथ सह-निवेश करेगी, जो किसी भारतीय चिप कंपनी में पैसा लगाएंगे। इससे सरकार को स्वयं परियोजनाओं के चयन की आवश्यकता नहीं होगी।

सरकार ने 15 जुलाई को 1.27 लाख करोड़ रुपये (लगभग 14 अरब डॉलर) के सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से छह साल तक लागू रहेगी। इसके तहत भारतीय चिप कंपनियों को अनुदान, इक्विटी निवेश या रॉयल्टी आधारित भुगतान के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्नत चिप डिजाइन के लिए निवेश की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

भारतीय सेमीकॉन मिशन के तहत अब तक 105 स्टार्टअप कंपनियों की पहचान की गई है, जो चिप डिजाइन के क्षेत्र में काम कर रही हैं। सरकार का मुख्य जोर देश में मजबूत चिप डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर है।

कृष्णन ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के दौरान भारत उन्नत चिप डिजाइन करने की क्षमता हासिल कर सकता है। हालांकि, देश में अत्याधुनिक चिप का विनिर्माण अभी निकट भविष्य में संभव नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार का लक्ष्य उन्नत चिप बनाने के बजाय उनके डिजाइन और बौद्धिक संपदा (आईपी) के विकास पर है।

वर्तमान में सात नैनोमीटर या उससे छोटे नोड वाली चिप को उन्नत श्रेणी का माना जाता है। भारत की पहली चिप विनिर्माण इकाई 28 नैनोमीटर प्रौद्योगिकी से उत्पादन शुरू करेगी, जिसका उपयोग मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में होता है।

उन्होंने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के माध्यम से भारत को वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है।

भाषा अजय अजय

अजय


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