एनसीएलएटी ने सृष्टि हॉस्पिटैलिटी की बिक्री को चुनौती वाली अपील खारिज की
एनसीएलएटी ने सृष्टि हॉस्पिटैलिटी की बिक्री को चुनौती वाली अपील खारिज की
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने दिवाला प्रक्रिया के तहत सृष्टि हॉस्पिटैलिटी की बिक्री को चुनौती देने वाली पूर्व प्रवर्तकों की अपीलों को खारिज कर दिया है।
न्यायाधिकरण ने संपत्ति के मूल्यांकन की दोबारा जांच करने से भी इनकार करते हुए कहा कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) पहले ही समाधान योजना को मंजूरी दे चुकी है और उसके व्यावसायिक निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
सृष्टि हॉस्पिटैलिटी के निलंबित निदेशक मंडल (पूर्व प्रवर्तकों) ने आरोप लगाया था कि कंपनी की संपत्ति का मूल्यांकन कम किया गया, जिससे उसे बेहद कम कीमत पर खरीदा जा सका।
इन आरोपों को खारिज करते हुए एनसीएलएटी ने कहा कि जब सीओसी मूल्यांकन से संतुष्ट होकर समाधान योजना को मंजूरी दे चुकी है, तो पूर्व प्रवर्तकों की ओर से लगाए गए ऐसे आरोपों पर विचार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने 12 जुलाई, 2024 को एडमास इंडस्ट्रीज, शुभ आशीष एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड और अमित जटिया के हार्डकैसल रेस्तरां वाले गठजोड़ की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना में 32.41 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया गया था।
इसके बाद पूर्व प्रवर्तकों ने एनसीएलएटी में अपील दायर की थी। उन्होंने मुंबई के विले पार्ले स्थित प्रमुख स्थान वाली संपत्ति के मूल्यांकन को चुनौती दी थी।
सृष्टि हॉस्पिटैलिटी के निलंबित निदेशक मंडल के सदस्य संतोष आर. शेट्टी ने दावा किया था कि वर्ष 2017 और 2020 में किए गए मूल्यांकन में संपत्ति का उचित बाजार मूल्य 76.72 करोड़ रुपये तक आंका गया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि दिवाला प्रक्रिया के दौरान किया गया मूल्यांकन इस तरह तैयार किया गया, जिससे गठजोड़ को यह संपत्ति कम कीमत पर मिल सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि पश्चिम और दक्षिण भारत में मैकडॉनल्ड्स की मास्टर फ्रेंचाइजी संचालित करने वाली हार्डकैसल रेस्तरां इस संपत्ति में अमेरिकी फास्ट फूड कंपनी की त्वरित सेवा रेस्तरां (क्यूएसआर) इकाई चला रही थी।
शेट्टी ने समाधान पेशेवर और गठजोड़ के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हें बेहतर समाधान योजना पेश करने का अवसर नहीं दिया गया।
हालांकि, एनसीएलएटी ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
न्यायाधिकरण ने कहा कि केवल भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) में पंजीकृत मूल्यांकक द्वारा कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू होने के बाद किया गया मूल्यांकन ही इस प्रक्रिया में मान्य माना जाएगा। दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले किए गए मूल्यांकन का इसमें कोई महत्व नहीं है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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