कोलकाता, 24 मार्च (भाषा) कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), उसकी अनुषंगी कंपनियों और सिंगेरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के कई पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने सेववानिवृत कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दखल की मांग की है।
उन्होंने बताया कि पेंशन की रकम ‘‘हमेशा एक जैसी ही रहती है।’’
इस पत्र पर दस्तखत करने वालों में शामिल सीआईएल के पूर्व निदेशक (तकनीकी) बिनय दयाल ने मंगलवार को बताया कि इन पीएसयू के 75 पूर्व चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और निदेशकों ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है। 23 मार्च की चिट्ठी में, पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि सेवानिवृति के समय तय की गई पेंशन ‘‘हमेशा एक जैसी ही रहती है, कीमतों में बढ़ोतरी के हिसाब से इसमें कोई बदलाव नहीं होता,’’ जिससे कई सेवानिवृत्त खनिकों को गुज़ारा करने में मुश्किल हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोल माइंस पेंशन स्कीम (सीएमपीएस)-1998 के कोष का गलत प्रबंधन और निवेश के गलत फैसले ही पेंशन की रकम के एक जगह रुके रहने की मुख्य वजह हैं। उन्होंने बताया कि ‘लोक लेखा समिति’ ने अपनी 12वीं रिपोर्ट में इन कमियों को उजागर किया था।
पत्र में दावा किया गया है कि सरकार की इस योजना की समीक्षा और इसमें सुधार करने की घोषित प्रतिबद्धता के बावजूद, कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।
पूर्व अधिकारियों ने बताया कि सीआईएल और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) मिलकर देश की 55 प्रतिशत से ज़्यादा व्यावसायिक ऊर्जा की ज़रूरतें पूरी करती हैं और राष्ट्रीय खजाने के लिए हर साल 70,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई करती हैं।
ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ़ कोल एग्जिक्यूटिव्स (एआईएसीई) और ऑल इंडिया कोल पेंशनर्स एसोसिएशन (एआईसीपीए) के संयोजक पी.के. सिंह राठौर ने कहा, ‘‘कोयला पेंशनभोगी कोई हमदर्दी नहीं मांग रहे हैं। वे सिर्फ़ अपने जायज़ हकों की बहाली की मांग कर रहे हैं।’’
पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में सीआईएल के पांच पूर्व चेयरमैन – एस.के. चौधरी, प्रसनजीत कुमार सेन गुप्ता, पार्थ एस. भट्टाचार्य, निर्मल चंद्र झा और अनिल कुमार झा – अनुषंगी कंपनियों के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी), और तकनीकी, वित्त, कार्मिक और विपणन विभागों के निदेशक शामिल हैं।
भाषा राजेश राजेश अजय
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