वित्तीय क्षेत्र में क्वांटम प्रौद्योगिकी की संभावनाओं के आकलन के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन
वित्तीय क्षेत्र में क्वांटम प्रौद्योगिकी की संभावनाओं के आकलन के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन
मुंबई, 25 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को वित्तीय क्षेत्र में क्वांटम प्रौद्योगिकी के संभावित लाभ, जोखिम एवं चुनौतियों का पता लगाने और उनके मूल्यांकन के लिए आठ-सदस्यीय विशेषज्ञ समिति के गठन की घोषणा की।
क्वांटम प्रौद्योगिकी पारंपरिक प्रणाली से अलग एक नई तकनीक है। यह क्वांटम यांत्रिकी के ‘सुपरपोजिशन’ (एक साथ कई अवस्थाओं में होना) और ‘एंटैंगलमेंट’ (कणों का आपस में जुड़ा होना) जैसे सिद्धांतों का उपयोग करती है।
आरबीआई ने कहा कि क्वांटम प्रणाली पोर्टफोलियो को अनुकूलतम बनाने, जोखिम मूल्यांकन और वृहद-आर्थिक मॉडलिंग जैसी जटिल वित्तीय समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होती हैं।
हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी में खासकरकुछ मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक मानकों को कमजोर करने की क्षमता है। इसको देखते हुए यह प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण जोखिम भी पैदा कर सकती हैं।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि संबंधित मुद्दों की जांच करने के लिए उसने ‘क्वांटम-सुरक्षित और अनुकूल वित्तीय परिवेश’ (क्यू-सेफ) के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया है।
समिति को क्रिप्टोग्राफी बिल ऑफ मैटेरियल्स (सीबीओएम) के माध्यम से वित्तीय क्षेत्र की क्रिप्टोग्राफिक सूची का मूल्यांकन करने, क्रिप्टो का आकलन करने और ऐसे खतरों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील महत्वपूर्ण प्रणालियों और प्रक्रियाओं की पहचान करने को कहा गया है।
यह समिति क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी को अपनाने के लिए उद्योग की तैयारियों का भी मूल्यांकन करेगी। साथ ही भारतीय वित्तीय प्रणाली को क्वांटम-सुरक्षित बनाने के लिए एक रूपरेखा भी सुझाएगी।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अनिल प्रभाकर को इस समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है।
समिति के सदस्यों में सुनील कुमार (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त सचिव), सतीश राव नागेश (एसबीआई के उप प्रबंध निदेशक), दिलीप आसबे (एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक और सीईओ), मनोज कुमार जैन (इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समूह समन्वयक), विनायक गोडसे (डीएससीआई के सीईओ) और एल वेंकट सुब्रमण्यम (क्वांटम इंडिया सर्वेंट लीडर, पूर्व-आईबीएम क्वांटम इंडिया प्रमुख) शामिल हैं।
आरबीआई के वित्तीय प्रौद्योगिकी विभाग के मुख्य महाप्रबंधक सुवेंदु पी को समिति का सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि समिति अपनी पहली बैठक की तारीख से छह महीने के भीतर रिपोर्ट देगी।
भाषा रमण प्रेम
प्रेम

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