भारत में बढ़ते सोने के आयात की व्याख्या

भारत में बढ़ते सोने के आयात की व्याख्या

भारत में बढ़ते सोने के आयात की व्याख्या
Modified Date: May 12, 2026 / 11:28 am IST
Published Date: May 12, 2026 11:28 am IST

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पश्चिम एशिया में तनाव के मद्देनजर मितव्ययिता अपनाने की अपील के बीच भारत में सोने का बढ़ता आयात चर्चा का केंद्र बन गया है।

मोदी ने रविवार को कहा था कि सरकार लोगों को पश्चिम एशिया संकट के प्रतिकूल प्रभाव से बचाने की कोशिश कर रही है। ईंधन का विवेकपूर्ण इस्तेमाल, सोने की खरीद टालने तथा विदेश यात्राओं को स्थगित करने जैसे कदम उठाने की जरूरत है ताकि अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।

भारत में सोने के आयात को समझने के लिए प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-

आयात के आंकड़े-

भारत का सोना आयात 2025-26 में 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह 2024-25 में 58 अरब डॉलर, 2023-24 में 45.54 अरब डॉलर, 2022-23 में 35 अरब डॉलर, 2021-22 में 46.14 अरब डॉलर, 2020-21 में 34.62 अरब डॉलर और 2019-20 में 28.2 अरब डॉलर था।

मात्रा के हिसाब से आयात 2025-26 में 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रह गया जो 2024-25 में 757.09 टन था। यह 2023-24 में 795.2 टन और 2022-23 में 678.3 टन था।

भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। आयात मुख्य रूप से आभूषण उद्योग द्वारा संचालित होता है। वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है।

आयात बढ़ने के कारण-

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार सोने के आयात में वृद्धि मुख्य रूप से कीमतों में उछाल के कारण हुई है। कीमत 2024-25 में 76,617.48 डॉलर प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2025-26 में 99,825.38 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गई।

राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अप्रैल पिछले वर्ष में यह पहली बार एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार गई थी।

उच्च आयात के प्रभाव-

सोने के अधिक आयात से देश के व्यापार घाटे एवं विदेशी मुद्रा व्यय पर दबाव पड़ता है। 2025-26 में व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया। चालू खाते का घाटा (सीएडी) भी प्रभावित हुआ।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में सीएडी बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) हो गया।

कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी नौ प्रतिशत से अधिक है। 2025-26 में भारत का कुल आयात 775 अरब डॉलर रहा।

आयात के प्रमुख स्रोत देश-

भारत के लिए सोने का सबसे बड़ा स्रोत स्विट्जरलैंड (करीब 40 प्रतिशत) है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16 प्रतिशत से अधिक) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10 प्रतिशत) का स्थान है। वहीं स्विट्जरलैंड से कुल माल आयात (सोने सहित) 2025-26 के दौरान 11.36 प्रतिशत बढ़कर 24.27 अरब डॉलर हो गया।

आयात कम करने के उपाय-

सरकार ने सोना, चांदी और प्लेटिनम से जुड़े उत्पादों के आयात पर नियंत्रण लगाए हैं ताकि मुक्त व्यापार समझौतों के दुरुपयोग को रोका जा सके। कुछ व्यापारी शुल्क अंतर का फायदा उठाकर थाईलैंड जैसे देशों से बिना जड़े आभूषण के नाम पर आयात बढ़ा रहे थे।

आयात शुल्क-

वर्ष 2022 में आयात शुल्क 10.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया। 2024-25 के बजट में इसे घटाकर छह प्रतिशत कर दिया गया ताकि आभूषण उद्योग को बढ़ावा मिले और तस्करी कम हो।

विशेषज्ञों की राय-

आर्थिक शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने सरकार से मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा करने को कहा है। खासकर भारत-यूएई व्यापार समझौते के तहत दी गई रियायतों को।

इस समझौते के तहत यूएई से सोना सामान्य शुल्क से एक प्रतिशत कम दर पर आयात किया जा सकता है। यह कोटा 120 टन से बढ़कर 2027 तक 200 टन हो जाएगा।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ 2024 में शुल्क घटने के बाद दुबई से आने वाला सोना प्रभावी रूप से केवल पांच प्रतिशत शुल्क पर भारत पहुंच रहा है।’’

उन्होंने कहा कि यूएई से सोने का आयात तेजी से बढ़ा है। 2022 में यह 2.9 अरब डॉलर, 2023 में 6.7 अरब डॉलर और 2025 में 16.5 अरब डॉलर रहा। एफटीए से पहले भारत के सोने के आयात में दुबई की हिस्सेदारी 7.9 प्रतिशत थी जो 2025 में बढ़कर 28 प्रतिशत हो जाएगी।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ यह प्रवृत्ति चिंताजनक है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात न तो सोने का खनन करता है और न ही कोई बड़ा प्रसंस्करण कार्य करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकांश व्यापार में तीसरे देशों से दुबई के रास्ते सोने की ढुलाई की जाती है, ताकि भारत के कम शुल्कों का लाभ उठाया जा सके।’’

जीटीआरआई ने सख्त नियम, रियायतों की समीक्षा और भविष्य के व्यापार समझौतों से सोना, चांदी, प्लेटिनम व हीरे को बाहर रखने की सिफारिश की है,ताकि भारत के व्यापार संतुलन एवं विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा की जा सके।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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