एफल 3आई की अपील खारिज, टैलेंट अनलिमिटेड के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया जारी रहेगी
एफल 3आई की अपील खारिज, टैलेंट अनलिमिटेड के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया जारी रहेगी
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने एफल 3आई लिमिटेड की टैलेंट अनलिमिटेड ऑनलाइन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दिवाला कार्रवाई शुरू करने के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।
हालांकि, एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने एफल 3आई लिमिटेड को एनसीएलटी के समक्ष दिवाला प्रक्रिया के कथित रूप से धोखाधड़ीपूर्ण या दुर्भावनापूर्ण तरीके से शुरू किए जाने के संबंध में नई अर्जी दाखिल करने की अनुमति दी है।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना (कार्यवाहक अध्यक्ष) और तकनीकी सदस्य बरुण मित्र की पीठ ने कहा कि मौजूदा आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है।
एनसीएलटी की दिल्ली पीठ ने 12 जून, 2026 को एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड की ओर से दायर दिवाला आवेदन को स्वीकार करते हुए टैलेंट अनलिमिटेड ऑनलाइन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू करने का आदेश दिया था।
टैलेंट अनलिमिटेड में अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर रखने वाली एफल 3आई लिमिटेड ने इस आदेश को एनसीएलएटी में चुनौती दी थी। कंपनी ने दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 65 का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि सीआईआरपी की शुरुआत धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से की गई और इसका उद्देश्य कंपनी के निलंबित प्रबंधन को मध्यस्थता पंचाट के फैसले के प्रवर्तन तथा निरीक्षण अधिकारों से बचने में मदद करना था।
हालांकि, एनसीएलएटी ने कहा कि धारा 65 के तहत धोखाधड़ी या दुर्भावनापूर्ण तरीके से दिवाला प्रक्रिया शुरू किए जाने का आरोप पहली बार अपीलीय स्तर पर नहीं उठाया जा सकता। इस मुद्दे को पहले एनसीएलटी के समक्ष रखा जाना चाहिए था।
पीठ ने कहा कि एफल 3आई लिमिटेड ने एनसीएलटी के समक्ष इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस बुनियादी सामग्री पेश नहीं की थी। साथ ही, धारा 65 के तहत दुर्भावनापूर्ण तरीके से दिवाला प्रक्रिया शुरू किए जाने के आरोप को साबित करने के लिए कठोर मानदंड पूरे करना आवश्यक है।
एनसीएलएटी ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर ऋण और चूक स्पष्ट रूप से स्थापित है। ऐसे में जब ये दोनों तत्व साबित हो जाते हैं, तो आईबीसी की धारा 7 के तहत दायर आवेदन को स्वीकार करना लगभग अनिवार्य हो जाता है।
एफल 3आई लिमिटेड का कहना था कि टैलेंट अनलिमिटेड ऑनलाइन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के सामने वित्तीय कठिनाइयां आने पर उसने कंपनी को दिवाला प्रक्रिया से पहले ऋण देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इसके बजाय ट्राइफेक्टा के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया। बाद में ट्राइफेक्टा ने ही धारा 7 के तहत दिवाला आवेदन दाखिल किया।
एफल 3आई ने यह भी दावा किया कि सीआईआरपी शुरू होने के बाद उसने बिना किसी कटौती के पूरा बकाया चुकाने की पेशकश की थी, लेकिन इस प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और ऋणदाताओं की समिति समाधान प्रक्रिया आगे बढ़ाती रही।
दूसरी ओर, वित्तीय ऋणदाता एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड ने एफल 3आई के दावे का विरोध करते हुए कहा कि उसकी आपत्ति मुख्य रूप से शेयरधारक के रूप में उसकी स्थिति से जुड़ी है और वह आईबीसी की धारा 61 के तहत ‘पीड़ित पक्ष’ नहीं है। उसने यह भी कहा कि धोखाधड़ी का आरोप एनसीएलटी के समक्ष नहीं लगाया गया था और पहली बार अपील में उठाया गया है।
एनसीएलएटी ने अंततः एफल 3आई लिमिटेड को एनसीएलटी के समक्ष धारा 65 के तहत उचित आवेदन दाखिल करने की स्वतंत्रता दे दी। एनसीएलटी इस आवेदन में एफल 3आई द्वारा उठाए गए सभी दावों के साथ-साथ उसकी याचिका दाखिल करने की पात्रता और अन्य संबंधित पहलुओं पर विचार करेगा।
भाषा अजय अजय
अजय

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