एफएमसीजी, खुदरा एवं खाद्य उद्योग शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत करें : उपभोक्ता मामलों की सचिव

एफएमसीजी, खुदरा एवं खाद्य उद्योग शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत करें : उपभोक्ता मामलों की सचिव

एफएमसीजी, खुदरा एवं खाद्य उद्योग शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत करें : उपभोक्ता मामलों की सचिव
Modified Date: August 4, 2026 / 04:50 pm IST
Published Date: August 4, 2026 4:50 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने ग्राहकों की बढ़ती शिकायतों पर मंगलवार को चिंता जाहिर करते हुए दैनिक उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी), खाद्य एवं खुदरा क्षेत्र से जुड़े उद्यमों से उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने का आग्रह किया ताकि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और सेवाएं मिल सकें।

उद्योग मंडल फिक्की द्वारा यहां आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में परीक्षण अवसंरचना को मजबूत करने तथा गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादों के नमूनों की जांच क्षमता बढ़ाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) तथा रोबोटिक्स का उपयोग बढ़ाने की जरूरत है।

खरे ने बताया कि सरकार भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित मानकों को सरल बनाने पर काम कर रही है ताकि उद्योग के लिए उनका अनुपालन आसान हो।

उन्होंने कहा, ‘‘उपभोक्ता मामलों के विभाग में हम ग्राहकों को गुणवत्ता और मात्रा दोनों का भरोसा दिलाते हैं। गुणवत्ता के लिए हमारे पास राष्ट्रीय मानक निकाय बीआईएस है। बीआईएस के तहत परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं, जो कई तृतीय-पक्ष परीक्षण सुविधाओं को मान्यता देती हैं तथा सूचीबद्ध करती हैं।’’

खरे ने कहा कि इसके अलावा ‘नेशनल टेस्ट हाउस’ वैमानिकी, ड्रोन, जैविक खाद्य परीक्षण, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी, स्विच और सौर पैनल जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए परीक्षण अवसंरचना विकसित कर रहा है।

उपभोक्ता मामलों की सचिव ने कहा, ‘‘अब यह समझने का समय आ गया है कि विनिर्माण और उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचने की प्रक्रिया में गुणवत्ता संबंधी चिंताओं पर ध्यान दिए बिना विकास संभव नहीं है। जैसे-जैसे उपभोक्ता जागरूक हो रहे हैं, उनकी अपेक्षाएं भी बढ़ रही हैं। हमें आज से पांच वर्ष पहले की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक शिकायतें मिल रही हैं।’’

उन्होंने कहा कि विभाग उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहा है। राष्ट्रीय उपभोक्ता ‘हेल्पलाइन’ के माध्यम से शिकायतें प्राप्त की जा रही हैं और यदि उपभोक्ताओं को नुकसान की भरपाई नहीं मिलती है तो वे ‘ई-जागृति’ मंच पर भी मामला दर्ज करा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अब अपनी समस्याओं और सवालों के बेहतर समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं, ‘‘उनकी शिकायतों का समुचित निवारण होना चाहिए।’’

खरे ने कहा, ‘‘ यदि हम अभी प्रतिदिन 30 नमूनों की जांच करते हैं तो इसे बढ़ाकर 300 नमूने प्रतिदिन तक किया जा सकता है। हमें इसी स्तर की क्षमता चाहिए और हम उसी दिशा में काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि सरकार ने कई प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य विनिर्माताओं और खुदरा कारोबारियों में विश्वास पैदा करना है और यह सुनिश्चित करना है कि छोटी एवं अनजाने में हुई गलतियों को अपराध नहीं माना जाए।’’

उन्होंने बताया कि विभाग ने विधिक मापविज्ञान अधिनियम के तहत ‘सुधार नोटिस’ का प्रावधान किया है।

उन्होंने कहा कि निर्माताओं और खुदरा कारोबारियों को अपनी त्रुटियां सुधारने के लिए समय दिया जाएगा। उसके बाद ही मामले को जुर्माना लगाकर निपटाने के लिए विचार किया जाएगा।

कारोबारी सुगमता के लिए सरकार ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) की संख्या भी कम की है।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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