किराया कानून की कार्यवाही के बिना भी संपत्ति खाली करा सकता है परिसमापक: एनसीएलएटी
किराया कानून की कार्यवाही के बिना भी संपत्ति खाली करा सकता है परिसमापक: एनसीएलएटी
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कहा है कि किसी कंपनी के परिसमापक को कॉरपोरेट देनदार की संपत्तियों पर कब्जा लेने के लिए किराया नियंत्रण कानून के तहत अलग कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है और वह सीधे एनसीएलटी के जरिये संपत्ति खाली करा सकता है।
एनसीएलएटी की दो-सदस्यीय पीठ ने लुधियाना की दो कंपनियों- ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स की अपील खारिज करते हुए इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की चंडीगढ़ पीठ के आदेश को बरकरार रखा।
एनसीएलटी ने दोनों कंपनियों को कराबारा और हुसैनपुरा स्थित दो वाणिज्यिक संपत्तियां दो सप्ताह के भीतर खाली करने का निर्देश दिया था।
दोनों कंपनियों ने इस आदेश को अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती देते हुए कहा था कि 30 साल के पट्टा विलेख (लीज डीड) के तहत उन्हें किरायेदारी का अधिकार हासिल है और बेदखली की कार्यवाही 1949 के ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रिस्ट्रिक्शन एक्ट के तहत किराया नियंत्रक के समक्ष ही की जा सकती है।
हालांकि, एनसीएलएटी ने यह दलील खारिज कर दी। उसने कहा कि संबंधित लीज डीड पंजीकृत नहीं थीं लिहाजा उन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि दोनों अपीलकर्ता कंपनियों के निदेशक कॉरपोरेट देनदार के निलंबित निदेशकों के करीबी रिश्तेदार थे।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 35 के तहत कॉरपोरेट देनदार की संपत्तियों पर कब्जा लेना परिसमापक का अनिवार्य वैधानिक दायित्व है। आईबीसी की धारा 238 का अन्य कानूनों पर अधिभावी प्रभाव है।
यह मामला वीनस गारमेंट्स (इंडिया) से संबंधित है। कंपनी को एनसीएलटी की चंडीगढ़ पीठ ने कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में लिया था और बाद में 22 जुलाई, 2025 को उसके परिसमापन का आदेश दिया गया था।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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