एफएसआईआई का 2035 तक वैश्विक बीज कारोबार में भारत की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य

एफएसआईआई का 2035 तक वैश्विक बीज कारोबार में भारत की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य

एफएसआईआई का 2035 तक वैश्विक बीज कारोबार में भारत की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य
Modified Date: September 24, 2026 / 09:42 pm IST
Published Date: September 24, 2026 9:42 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) भारतीय बीज उद्योग महासंघ (एफएसआईआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह वैश्विक बीज कारोबार में भारत की हिस्सेदारी को मौजूदा के एक प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2035 तक 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य बना रहा है और शोध गतिविधियों में और निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है।

महासंघ ने राजधानी में अपनी 10वीं सालाना आम बैठक आयोजित की। एफएसआईआई ने कहा कि उद्योग के वर्ष 2030 तक 3.6 अरब डॉलर से बढ़कर पांच अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है।

एक बयान में, एफएसआईआई ने कहा कि उद्योग का लक्ष्य ‘‘वर्ष 2035 तक वैश्विक बीज कारोबार में भारत की हिस्सेदारी को लगभग एक प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करना’’ है, साथ ही तिलहन और दलहनों जैसी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फसलों में घरेलू नवाचार और आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।

एफएसआईआई के चेयरमैन अजय राणा ने कहा, ‘‘भारत के पास वैश्विक बीज बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने के लिए विज्ञान, प्रतिभा और किसान हैं। सरकार की पहल जैसे कि ‘राष्ट्रीय अधिक उपज देने वाले बीज मिशन’ महत्वपूर्ण कदम हैं। उद्योग शोध में, खासकर तिलहन और दलहनों में, और अधिक निवेश करने के लिए तैयार है।’’

उन्होंने बीज विनियमन के लिए एक एकल राष्ट्रीय रूपरेखा की मांग की, जिसमें अनुमानित समय-सीमा हो, नई किस्मों, गुणों और तकनीकों के लिए विज्ञान आधारित तेजी से मंजूरी मिले, और बौद्धिक संपदा की मजबूत सुरक्षा हो, खासकर तिलहन और दलहनों के मामले में।

राणा ने कहा, ‘‘जबकि विकसित देश अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 3-4 प्रतिशत शोध एवं विकास पर खर्च करते हैं, हमारा निवेश एक प्रतिशत से भी कम है। शोध से पता चलता है कि शोध एवं विकास पर खर्च किए गए हर रुपये से 13 रुपये का लाभ मिल सकता है।’’

एफएसआईआई ने कहा कि उद्योग ने सरसों की संकर किस्में विकसित की हैं जो किसानों को प्रति एकड़ एक टन की पैदावार देती हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि होती है, जबकि गेहूं से कम लाभ मिलता है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


लेखक के बारे में