नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) पेट्रोल और डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क कटौती और विमान ईंधन (एटीएफ) तथा डीजल के निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी से पखवाड़े में शुद्ध रूप से 5,500 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने शुक्रवार को बताया कि उत्पाद शुल्क में कटौती से करीब 7,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा, जबकि डीजल तथा एटीएफ के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी से पखवाड़े में 1,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।
उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद पेट्रोल पर कुल उत्पाद शुल्क 11.9 रुपये प्रति लीटर होगा। इसमें 1.40 रुपये मूल उत्पाद शुल्क, तीन रुपये विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, 2.50 रुपये कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर और पांच रुपये सड़क अवसंरचना उपकर शामिल है।
डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर 26 मार्च से प्रभावी रूप से क्रमशः 21.5 रुपये प्रति लीटर और 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है।
इन दरों की समीक्षा हर पखवाड़े की जाएगी।
चतुर्वेदी ने संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लगाने का उद्देश्य ‘‘ डीजल व एटीएफ की घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से बढ़ी वैश्विक अनिश्चितता के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।’’
उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती का उद्देश्य तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की कम वसूली (अंडर-रिकवरी) को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों के लिए कीमतें न बढ़ें।
चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘ स्थिति गतिशील है। यह सामान्य कारोबार जैसा नहीं है, जहां यह अनुमान लगाया जा सके कि कितने टन सामान आएगा। हम कठिन समय में जी रहे हैं। किसी भी (राजस्व) प्रभाव का आकलन देश में आने वाली वस्तुओं की वास्तविक आपूर्ति को ध्यान में रखकर ही करना होगा।’’
पेट्रोल व डीजल पर उत्पाद शुल्क में यह कटौती अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल के कारण तेल कंपनियों को हुए रिकॉर्ड नुकसान के बाद की गई है। पेट्रोल और डीजल बनाने के कच्चे माल कच्चे तेल की कीमत इस महीने लगभग 50 प्रतिशत बढ़ गई है क्योंकि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले तथा तेहरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई से वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है।
तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बावजूद पेट्रोल पंप पर कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इससे तेल कंपनियों को रिकॉर्ड नुकसान हुआ, जिसका असर उनके कार्यशील पूंजी पर भी पड़ने लगा था।
इस महीने की शुरुआत में ईरान युद्ध के तेज होने के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो बाद में घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
भाषा निहारिका रमण
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