नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। हालांकि इससे ईंधन के खुदरा दाम में कोई बदलाव नहीं होगा क्योंकि कंपनियां इसका उपयोग कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत का भरपाई के लिए करेंगी।
इस कटौती से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली उस वृद्धि को टाल दिया गया है जो पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि को देखते हुए आवश्यक हो गई थी।
बृहस्पतिवार देर रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। हालांकि, इस कटौती से पेट्रोल पंप पर कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि इसे तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए समायोजित किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने डीजल के निर्यात पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क (विंडफॉल टैक्स) लगा दिया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रिफाइनरी कंपनियों के ‘अप्रत्याशित लाभ’ पर लगाम लगाने के लिए जुलाई 2022 में पहली बार यह (विंडफॉल टैक्स) कर लगाया गया था, जिसे दिसंबर 2024 में हटा लिया गया था।
हालांकि, पिछली बार के विपरीत तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) जैसी घरेलू कच्चा तेल उत्पादक कंपनियों पर कोई अप्रत्याशित लाभ कर नहीं लगाया गया है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि निर्यात पर इस अप्रत्याशित लाभ कर से सरकार को पहले पखवाड़े में लगभग 1,500 करोड़ रुपये का लाभ होगा, जबकि उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण सरकार को 7,000 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का त्याग करना होगा। उन्होंने निर्यात कर लगाने का तर्क देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल ने रिफाइनरी कंपनियों के लिए निर्यात को अधिक आकर्षक बना दिया था। सरकार के इस कदम से घरेलू खपत के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
चतुर्वेदी ने कहा कि निर्यात कर की हर 15 दिन में समीक्षा की जाएगी, जैसा कि पहले किया जाता रहा है ताकि शुल्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा दरों के अनुरूप रखा जा सके।
उन्होंने बताया कि इस कटौती के बाद पेट्रोल पर प्रभावी उत्पाद शुल्क 21.90 रुपये से घटकर 11.90 रुपये प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर यह 17.80 रुपये से घटकर 7.80 रुपये प्रति लीटर हो गया है।’
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि पेट्रोल और डीजल बनाने के मुख्य कच्चे माल यानी कच्चे तेल की कीमतें पश्चिम एशिया संकट से पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘सरकार के पास दो विकल्प थे – या तो कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाए या उत्पाद शुल्क घटाकर खुद नुकसान सहा जाए। सरकार ने दूसरा विकल्प चुना।’
शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि रिफाइनरी कंपनियों के लिए 2022 का वह नियम अब भी प्रभावी है, जिसके तहत उन्हें अपने पेट्रोल निर्यात का 50 प्रतिशत और डीजल निर्यात का 30 प्रतिशत हिस्सा पहले घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य है।
यह कर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किए जाने वाले निर्यात और विदेशी उड़ानों को दिए जाने वाले एटीएफ पर लागू नहीं होगा।
मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया के युद्ध ने न केवल तेल की कीमतों को बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी बाधित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बाधा आने से कच्चे तेल के साथ-साथ एलपीजी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
इस कमी को पूरा करने और घरेलू किल्लत को रोकने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने ठोस कदम उठाए हैं। इन कंपनियों ने पेट्रोकेमिकल्स के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली अपनी उत्पादन इकाइयों को एलपीजी की ओर केंद्रित कर दिया है, जिससे घरेलू रसोई गैस के उत्पादन में 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये का ‘भारी नुकसान’ हो रहा है।
वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक बयान में उत्पाद शुल्क में कटौती का तर्क देते हुए कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों पर तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को पेट्रोल पर लगभग 26 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 81.90 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। कंपनियों की वर्तमान में दैनिक ‘अंडर रिकवरी’ (लागत और बिक्री मूल्य में अंतर) लगभग 2,400 करोड़ रुपये है।।’
उत्पाद शुल्क में इस कटौती के बाद पेट्रोल पर प्रभावी उत्पाद शुल्क 21.90 रुपये से घटकर 11.90 रुपये प्रति लीटर रह जाएगा (जिसमें 1.40 रुपये मूल उत्पाद शुल्क, 3 रुपये विशेष अतिरिक्त शुल्क, 2.50 रुपये कृषि उपकर और 5 रुपये सड़क बुनियादी ढांचा उपकर शामिल है)।
वहीं, डीजल पर प्रभावी शुल्क 17.80 रुपये से घटकर 7.80 रुपये प्रति लीटर (1.80 रुपये मूल शुल्क, 4 रुपये कृषि उपकर और 2 रुपये सड़क उपकर) रह जाएगा।
उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, देश में सालाना 175 अरब लीटर ईंधन की बिक्री (115 अरब लीटर डीजल और 60 अरब लीटर पेट्रोल) को देखते हुए, इस शुल्क कटौती का राजकोषीय प्रभाव सरकारी खजाने पर सालाना 1.75 लाख करोड़ रुपये होगा।
तनाव का पहला संकेत तब मिला जब देश के सबसे बड़े निजी खुदरा ईंधन विक्रेता ‘नायरा एनर्जी’ ने बृहस्पतिवार को पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी।
नायरा के पेट्रोल पंप पर अब पेट्रोल 100.71 रुपये और डीजल 91.31 रुपये लीटर है। बाजार के 90 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अभी कीमतों को दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रखा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि उत्पाद शुल्क में यह कटौती ‘उपभोक्ताओं को कीमतों में होने वाली वृद्धि से सुरक्षा प्रदान करेगी।’
उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की लागत और आपूर्ति की अनिश्चितताओं से सुरक्षित रखा जाए।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले एक महीने के भीतर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘इसके परिणामस्वरूप, दुनिया भर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30 से 50 प्रतिशत, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30 प्रतिशत, यूरोप में 20 प्रतिशत और अफ्रीकी देशों में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।’
मंत्री ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पिछले चार वर्षों की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, सरकार ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर अपने खजाने पर बोझ सहने का निर्णय लिया है। सरकार के पास दो ही विकल्प थे – या तो कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जाए या फिर अपने वित्त पर इस बोझ को खुद सहा जाए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में ‘लॉकडाउन’ की अफवाहें पूरी तरह से निराधार और गलत हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं स्पष्ट कर दूँ कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे समय में शांत, जिम्मेदार और एकजुट रहना महत्वपूर्ण है। अफवाह फैलाना और दहशत पैदा करना गैर-जिम्मेदाराना और नुकसानदायक है।’
भाषा रमण
रमण