अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी ईंधन कीमतों में लंबे समय तक रहेगा उतार-चढ़ाव: विश्लेषक

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी ईंधन कीमतों में लंबे समय तक रहेगा उतार-चढ़ाव: विश्लेषक

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी ईंधन कीमतों में लंबे समय तक रहेगा उतार-चढ़ाव: विश्लेषक
Modified Date: June 16, 2026 / 05:26 pm IST
Published Date: June 16, 2026 5:26 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने के संकेतों के बीच कच्चे तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि आपूर्ति बाधित होने, ऊर्जा ढांचों को हुए नुकसान और सीमित भंडार के कारण वैश्विक ईंधन बाजारों में आने वाले कई महीनों तक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक सेहुल भट्ट ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की संभावना से ईंधन बाजारों में तनाव जोखिम में भारी गिरावट आई है।’’

भट्ट ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, घरेलू ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और उत्पादन शुल्क में कमी ने पेट्रोल तथा डीजल पर होने वाले नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर दी है।

इक्रा लिमिटेड में कॉरपोरेट रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘‘कच्चे तेल की कीमतों को युद्ध से पहले के स्तर पर वापस आने में छह महीने से एक साल तक का समय लग सकता है, क्योंकि पश्चिम एशिया में हर दिन लगभग एक करोड़ बैरल से अधिक तेल उत्पादन प्रभावित हो गया है और कुछ सुविधाओं को नुकसान भी पहुंचा है।’’

उन्होंने कहा कि अगर ईरानी कच्चे तेल पर लगा प्रतिबंध हटता है तो भारत को फ़ायदा होगा, क्योंकि भौगोलिक नज़दीकी और ईरान की ओर से ऐतिहासिक रूप से मिलने वाली बेहतर भुगतान शर्तें इसके पक्ष में हैं।

इक्विरस सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख मौलिक पटेल ने कहा, ‘‘समझौते की घोषणा के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमत लुढ़ककर लगभग 82-84 डॉलर प्रति बैरल हो गई, क्योंकि बाजार में जोखिम घट गया है।’’

पटेल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेल का भंडार पहले से काफी कम है और आपूर्ति में लगातार रुकावटों की वजह से तेल की कीमतें संकट से पहले के स्तर यानी 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास वापस आने की संभावना कम है। इक्विरस का अनुमान है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें 75-80 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में स्थिर हो जाएंगी, भले ही इस साल के आखिर में होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुल जाए, फिर भी कीमतों के 60-70 डॉलर के दायरे में लौटने की संभावना कम है।

भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र में जहाज ढुलाई मार्ग फिर से खुलने से कच्चे तेल की आपूर्ति बेहतर होने और माल ढुलाई का खर्च कम होने की उम्मीद है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि व्यापार के सामान्य होने में समय लगेगा।

भाषा यासिर अजय

अजय


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