नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कहा कि सरकार देशभर में ईंधन आपूर्ति की दैनिक आधार पर निगरानी कर रही है और पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कुछ पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी का कारण घबराकर पेट्रोल और डीजल की खरीद होना है।
शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू खाना पकाने की गैस (एलपीजी) का पर्याप्त स्टॉक है। कुछ पंप पर ईंधन की कमी मांग में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि का परिणाम है। उदाहरण के लिए कृषि में बढ़ी खपत और कीमतों में अंतर के कारण थोक उपभोक्ता अपनी जरूरतों के लिए पेट्रोल पंप का रुख कर रहे हैं।
इसके अलावा, निजी पंप सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की तुलना में कम-से-कम पांच रुपये और तीन रुपये प्रति लीटर अधिक दरों पर पेट्रोल और डीजल बेच रहे हैं। इससे लोग ईंधन पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के पेट्रोल पंप से खरीद रहे हैं। इनके परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी हुई है।
शर्मा ने कहा कि पेट्रोलियम विपणन कंपनियां पेट्रोल पंप पर कड़ी नजर रख रही हैं और कुछ क्षेत्रों में मांग बढ़ने के कारण ईंधन की कमी को रोकने के लिए भंडार को फिर से भर रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पेट्रोलियम विपणन कंपनियों और पेट्रोलियम मंत्रालय के स्तर पर सभी पेट्रोल पंप की बारीकी से निगरानी की जा रही है…। आपूर्ति की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की कमी को तुरंत दूर किया जा सके और सभी पंप पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक फिर से भरा जा सके।’’
शर्मा ने कहा, ‘‘देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त आपूर्ति है।’’
उन्होंने उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि वे घबराकर खरीदारी न करें, ईंधन की बचत करें और जहां संभव हो, पाइप वाली प्राकृतिक गैस और इंडक्शन चूल्हे जैसे विकल्पों का उपयोग करें।
शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए पेट्रोल पंप आमतौर पर दो-तीन दिन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए स्टॉक रखते हैं। और जब अचानक 20-30 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो अंतिम छोर तक स्टॉक पहुंचाने में कुछ कठिनाई हो सकती है।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि डिपो और टर्मिनल में पर्याप्त स्टॉक नहीं है, बल्कि अंतिम छोर तक आपूर्ति में बाधाओं के कारण कुछ दिक्कतें आ रही हैं।
शर्मा ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति से निपटने के लिए, खुदरा नेटवर्क की दैनिक निगरानी की जा रही है। और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि यदि किसी भी स्थान पर स्टॉक की आवश्यकता हो, तो उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए।’’
साथ ही, जमाखोरी और कुप्रबंधन को रोकने के लिए राज्य सरकारों से भी मदद मांगी जा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक की थी। बैठक में उनसे स्थानीय आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखने और जमाखोरी या कुप्रबंधन को रोकने का आग्रह किया गया था।
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन प्रवाह में समस्या के बावजूद, शर्मा ने कहा कि भारत के पास पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और देश भर में निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारी ने कहा कि इस संकट ने भारत के कच्चे तेल आयात के लगभग 40 प्रतिशत, एलपीजी आयात के 90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस आयात के 65 प्रतिशत को प्रभावित किया है।
हालांकि, कच्चे तेल (पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन बनाने का कच्चा माल) की आपूर्ति वैकल्पिक स्रोतों से की जा रही है। वहीं घरेलू उपलब्धता को बनाए रखने के लिए रिफाइनरियों में एलपीजी का उत्पादन बढ़ाकर लगभग 50,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है।
भाषा रमण अजय
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