नयी दिल्ली, एक दिसंबर (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की गेल इंडिया लिमिटेड ने शुक्रवार को कहा कि उसने समझौते के अनुरूप एलएनजी की आपूर्ति नहीं करने पर रूसी ऊर्जा कंपनी गैजप्रॉम की एक पूर्व इकाई के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की है जिसमें हर्जाने के तौर पर 1.817 अरब डॉलर की मांग की गई है।
गेल इंडिया ने शेयर बाजार को दी गई एक सूचना में कहा कि उसने ‘दीर्घकालिक अनुबंध के तहत एलएनजी की आपूर्ति न होने’ पर लंदन स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय में यह अर्जी लगाई है।
गेल ने वर्ष 2012 में रूस की अग्रणी ऊर्जा कंपनी गैजप्रॉम के साथ प्रति वर्ष 28.5 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) खरीदने के लिए 20 साल का समझौता किया था। यह सौदा गैजप्रॉम मार्केटिंग एंड सिंगापुर (जीएमटीएस) के साथ किया गया था जो तब गैजप्रॉम जर्मनिया (अब सेफे) की एक इकाई थी।
लेकिन पिछले साल यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच गैजप्रॉम ने सेफे से अपना नाता तोड़ लिया था। इसके बाद सेफे ने अपनी जरूरतों का हवाला देते हुए जून, 2022 में गेल इंडिया को एलएनजी की आपूर्ति बंद कर दी थी।
गेल ने नियामकीय सूचना में कहा है कि यह मुकदमा सेफे मार्केटिंग एंड ट्रेडिंग सिंगापुर प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में जीएमटीस) पर दायर किया गया है और इसमें 1.817 अरब डॉलर और वैकल्पिक राहत की मांग की गई है। यह दावा शुक्रवार को दाखिल किया गया।
गेल ने गैस की आपूर्ति का सौदा गैजप्रॉम की जर्मन अनुषंगी और सिंगापुर स्थित कंपनी के साथ किया था। लेकिन यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद जर्मन सरकार ने इस इकाई को अपने नियंत्रण में ले लिया और उसे रूस से माल लेने से रोक दिया। इससे एलएनजी की आपूर्ति बाधित हो गई थी।
हालांकि अप्रैल, 2023 में सेफे ने गेल इंडिया को गैस की आपूर्ति बहाल कर दी थी।
गेल का कहना है कि यह सौदा एक पोर्टफोलियो अनुबंध था और इसके तहत किसी भी स्थिति में गैस आपूर्ति रोकी नहीं जा सकती है। यदि रूस से माल मंगाने में दिक्कत थी तो आपूर्तिकर्ता को अन्य स्थानों से माल का इंतजाम करना चाहिए था।
गेल ने 2012 में सालाना 28.5 लाख टन एलएनजी खरीद के लिए जीएमटीएस के साथ 20 साल का समझौता किया था। इस सौदे के तहत आपूर्ति वर्ष 2018 में शुरू हुई थी और वर्ष 2023 में इसे पूरी मात्रा पर पहुंचना था।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण