सोने की वैश्विक मांग अप्रैल-जून तिमाही में 1,269 टन पर स्थिर: डब्ल्यूजीसी
सोने की वैश्विक मांग अप्रैल-जून तिमाही में 1,269 टन पर स्थिर: डब्ल्यूजीसी
मुंबई, 30 जुलाई (भाषा) सोने की वैश्विक मांग अप्रैल-जून तिमाही में सालाना आधार पर लगभग स्थिर रहकर 1,269 टन दर्ज की गई। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, सोने की कीमत के इस वर्ष की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कुछ नरमी आई है।
डब्ल्यूजीसी की 2026 की दूसरी (अप्रैल-जून) तिमाही पर आधारित ‘क्यू2 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट के अनुसार 2025 की समान तिमाही में सोने की कुल मांग 1,268.6 टन थी।
वर्ष 2026 की पहली (जनवरी-जून) छमाही में सोने की मांग सालाना आधार पर दो प्रतिशत बढ़कर अनुमानित 2,522 टन रही, जिसका मूल्य 3,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा।
दूसरी तिमाही में गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड), सोने के बिस्कुट व सिक्कों में निवेश घटकर 262 टन रह गया, क्योंकि सोने की कीमतों में नरमी आने से वर्ष की शुरुआत में देखी गई निवेश की मजबूत रफ्तार धीमी पड़ गई।
डब्ल्यूजीसी के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से अप्रैल-जून अवधि में गोल्ड समर्थित ईटीएफ से 45 टन की निकासी के कारण रही, हालांकि पहली छमाही में ईटीएफ की कुल मांग 18 टन के साथ सकारात्मक बनी रही।
सोने के बिस्कुट व सिक्कों में निवेश अपेक्षाकृत स्थिर रहा और तिमाही के दौरान यह सालाना आधार पर केवल तीन प्रतिशत घटा। पहली (जनवरी-मार्च) तिमाही के असाधारण प्रदर्शन के कारण पहली छमाही में इसकी मांग पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक रही।
वहीं, एशियाई निवेशकों के समर्थन से ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) बाजार में मांग दूसरी तिमाही में 327 टन रही जो पहली छमाही में 571 टन थी।
डब्ल्यूजीसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत) सचिन जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थानों ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान अपने भंडार में शुद्ध 289 टन सोना जोड़ा जो सालाना आधार पर 62 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने कहा कि पोलैंड, चीन और चेक गणराज्य जैसे देशों की अगुवाई में कई बाजारों में खरीद बढ़ी।
उन्होंने कहा, ‘‘ भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 200 किलोग्राम सोना खरीदा।’’
डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि ऊंची कीमतों का असर दूसरी तिमाही में आभूषणों की मांग पर भी पड़ा। उपभोक्ताओं ने कम सोना खरीदा और हल्के आभूषणों की ओर रुख किया जिससे आभूषणों की मांग सालाना आधार पर 17 प्रतिशत घट गई।
इसके परिणामस्वरूप पहली छमाही में मात्रा के लिहाज से आभूषणों की मांग घटी लेकिन मूल्य के आधार पर मांग मजबूत रही। इस दौरान वैश्विक स्तर पर आभूषणों की मांग 22 प्रतिशत बढ़कर 860 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गई।
रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही में सोने की कुल वैश्विक आपूर्ति सालाना आधार पर 1,269 टन पर स्थिर रही क्योंकि खनन उत्पादन और पुनर्चक्रण की प्रवृत्तियां अलग-अलग रहीं।
खदानों से सोने की आपूर्ति सालाना आधार पर अनुमानित दो प्रतिशत बढ़कर 966 टन हो गई। इसमें कनाडा और चिली में नए उत्पादन का योगदान रहा।
वहीं, ऊंची कीमतों के बावजूद पुराना सोना देकर सोने का नया सामान लेने (पुनर्चक्रण) की मात्रा सालाना आधार पर छह प्रतिशत घट गई।
डब्ल्यूजीसी की वरिष्ठ बाजार विश्लेषक लुईस स्ट्रीट ने कहा कि वर्ष की शुरुआत में सोने की कीमतों में आई तेज वृद्धि दूसरी तिमाही में थम गई और रिकॉर्ड ऊंचाई से सुधार के बाद कीमतें स्थिर होने लगीं।
स्ट्रीट ने कहा, ‘‘ सोने की कीमतों में नरमी के साथ गोल्ड ईटीएफ में निवेश घटा। हालांकि, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और ओटीसी निवेश में वृद्धि के कारण वर्ष की पहली छमाही में कुल सोने की मांग दो प्रतिशत बढ़ी।’’
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 की दूसरी (जुलाई-दिसंबर) छमाही में निवेश मांग वृद्धि का प्रमुख आधार रहने की संभावना है। हालांकि, मांग की संरचना में बदलाव आ सकता है।
भाषा निहारिका
निहारिका

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