नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम पावरग्रिड की इक्विटी निवेश सीमा को प्रति अनुषंगी कंपनी 5,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7,500 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी ताकि वह अत्यधिक पूंजी की जरूरत वाली पारेषण परियोजनाओं के लिए बोली लगा सके।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की प्रधानमंत्री के नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में हुई पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘ सीसीईए ने लोक उपक्रम विभाग (डीपीई) के चार फरवरी, 2010 के दिशानिर्देशों के तहत पावरग्रिड को महारत्न कंपनियों को प्राप्त शक्तियों को बढ़ाने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘ इस मंजूरी के तहत पावरग्रिड की प्रति अनुषंगी कंपनी अनुमेय इक्विटी निवेश सीमा को मौजूदा 5,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है जबकि कंपनी की निवल संपत्ति की 15 प्रतिशत की मौजूदा सीमा को बरकरार रखा गया है।’’
इस मंजूरी से देश की सबसे बड़ी और सबसे अनुभवी पारेषण सेवा प्रदाता पावरग्रिड को अपने मुख्य व्यवसाय में निवेश बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की निकासी (इवैक्यूएशन) का समर्थन करने में मदद मिलेगी जिससे गैर-जीवाश्म आधारित स्रोतों से 500 गीगावाट का लक्ष्य हासिल करने में सहायता मिलेगी।
अब यह केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (सीपीएसई) अल्ट्रा हाई वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट (यूएचवीएसी) और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) पारेषण नेटवर्क जैसी अधिक की पूंजी की जरूरत वाली पारेषण परियोजनाओं के लिए बोलियों में भाग ले सकेगा।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इससे महत्वपूर्ण पारेषण परियोजनाओं के लिए बोलीदाताओं के चयन में शुल्क-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी जिससे बेहतर मूल्य खोज सुनिश्चित होगी और अंततः उपभोक्ताओं को सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो पाएगी।
भाषा निहारिका अजय
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