सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए सीएएफई-3 मानदंड किए अधिसूचित

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सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए सीएएफई-3 मानदंड किए अधिसूचित

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  • Publish Date - September 30, 2026 / 11:31 AM IST,
    Updated On - September 30, 2026 / 11:31 AM IST

नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) सरकार ने नए कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता 2027 मानदंड (सीएएफई-3) अधिसूचित किए हैं। इनके तहत एक अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक यात्री वाहनों के लिए ईंधन दक्षता और कार्बन उत्सर्जन की सीमाएं तय की जाएंगी।

नए मानदंडों में मुख्य रूप से यात्री कारें शामिल हैं। इनमें हैचबैक, सेडान, विशेष उपयोगिता वाहन (एसयूवी) और एमपीवी प्रमुख हैं जिनमें चालक के अलावा आठ यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।

बिजली मंत्रालय ने बयान में कहा कि नए मानदंड भारत में बिक्री के लिए निर्मित या आयात किए जाने वाले नए यात्री वाहनों पर लागू होंगे।

नए मानदंडों से उपभोक्ताओं को प्रौद्योगिकी के लिहाज से अधिक विकल्प मिलेंगे, जबकि कार विनिर्माताओं को उसी के अनुरूप अपने उत्पादन की योजना बनानी होगी।

एक बड़े बदलाव के तहत सीएएफई-3 नियमों के मसौदे में शुरू में 909 किलोग्राम से कम वजन वाली पेट्रोल कारों को किफायती बनाए रखने के लिए रियायत देने का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम मानदंडों में यह लाभ हटा दिया गया है।

नए मानदंडों के तहत संशोधित लक्ष्य रेखा को भी समतल किया गया है, जिससे वजन के आधार पर अधिक संतुलित व्यवस्था उपलब्ध होगी। इसके तहत हल्के वाहनों के लिए अपेक्षाकृत नरम लक्ष्य और भारी वाहनों के लिए अधिक ईंधन दक्षता संबंधी आवश्यकताएं होंगी।

मौजूदा मानदंडों के तहत 1,082 किलोग्राम के संदर्भ वजन को नए सीएएफई मानदंडों में बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया है। यह करीब 13.6 प्रतिशत की वृद्धि है और यात्री वाहन बेड़े की बदलती विशेषताओं को दर्शाती है।

नए मानदंड विनिर्माताओं को स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, वैकल्पिक ईंधन और अन्य नवोन्मेषी समाधानों को अपनाने की सुविधा देते हैं।

स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नए नियम बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी), रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों (आरईईवी), प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (पीएचईवी), मजबूत हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (एसएचईवी) और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ‘‘सुपर क्रेडिट’’ की सुविधा देते हैं। इससे वैकल्पिक ईंधन वाले मॉडल बनाने पर विनिर्माताओं के लिए बेड़े के उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करना आसान होगा।

संशोधित नियमों के तहत कुल बेड़े के औसत उत्सर्जन की गणना करते समय वैकल्पिक ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और हाइब्रिड वाहनों को मात्रा संबंधी छूट गुणक मिलेंगे, जिन्हें आमतौर पर ‘‘सुपर क्रेडिट’’ कहा जाता है।

बयान में कहा गया, ‘‘इससे विनिर्माताओं को स्वच्छ और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल तथा बाजार में उनकी पहुंच बढ़ाने में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।’’

इसके अलावा, ईंधन खपत के मानक को 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से घटाकर 2031-32 में 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर किया गया है। यह इस अवधि में करीब 16.7 प्रतिशत सुधार दर्शाता है।

नया सीएएफई ढांचा सभी पांच वर्षों में सालाना आधार पर लक्ष्यों को कड़ा करके ईंधन दक्षता में क्रमिक सुधार को बढ़ावा देगा।

बयान में कहा गया कि नया सीएएफई ढांचा ईंधन दक्षता में सुधार और भारत के ऊर्जा सुरक्षा एवं टिकाऊपन संबंधी उद्देश्यों के लिए सौर परावर्तक पेंट, उन्नत ग्लेजिंग तथा उच्च दक्षता वाली एयर कंडीशनिंग (एसी) जैसी नई प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा देता है।

सीएएफई-3 मानदंडों में ‘क्रेडिट-डेबिट’ व्यवस्था भी शुरू की गई है। यह ढांचा विनिर्माताओं को सीएएफई लक्ष्यों को पूरा करने में अतिरिक्त लचीलापन देता है। लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां क्रेडिट अर्जित करेंगी, जिन्हें आगे के वर्षों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

इसके विपरीत, लक्ष्य से पीछे रहने वाली कंपनियां पिछले क्रेडिट का इस्तेमाल करके, अन्य वाहन विनिर्माताओं के साथ क्रेडिट का कारोबार करके या ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा संचालित खरीद कार्यक्रम के जरिये क्रेडिट खरीदकर अपनी कमी पूरी कर सकती हैं।

यात्री वाहन क्षेत्र भारत की परिवहन ऊर्जा मांग में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है और जीवाश्म ईंधन की खपत में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

नया सीएएफई ढांचा प्रौद्योगिकी प्रगति, वैकल्पिक एवं नवीकरणीय ईंधन की बढ़ती उपलब्धता, बढ़ते विद्युतीकरण तथा वैश्विक वाहन प्रौद्योगिकियों में बदलाव के अनुरूप है और इनका समर्थन करता है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा