हिंदुस्तान कॉपर में हिस्सेदारी बिक्री के जरिये सरकार ने करीब 3,000 करोड़ रुपये जुटाए
हिंदुस्तान कॉपर में हिस्सेदारी बिक्री के जरिये सरकार ने करीब 3,000 करोड़ रुपये जुटाए
नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर में अपनी हिस्सेदारी बिक्री की पेशकश (ओएफएस) के जरिये सरकार ने करीब 3,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह दो-दिन का ओएफएस बुधवार को बंद हुआ।
निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ओएफएस को खुदरा निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली और दोनों दिन इसे निर्धारित शेयरों से अधिक अभिदान मिला।
चावला ने कहा, ‘‘दोनों दिन इस पेशकश को निर्धारित शेयरों से अधिक अभिदान मिला और सरकार ने अपने पूरे ‘ग्रीनशू’ विकल्प का इस्तेमाल करने का फैसला किया। हम सभी निवेशकों को उनकी भागीदारी और हम पर भरोसा जताने के लिए धन्यवाद देते हैं।’’
ओएफएस के तहत 5.80 करोड़ शेयरों की पेशकश की गई थी। इसका आधार प्रस्ताव 2,90,10,721 शेयरों का था, जबकि इतनी ही संख्या में अतिरिक्त शेयरों का ‘ग्रीनशू’ विकल्प रखा गया था।
शेयर बाजारों पर ओएफएस के बारे में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिक्री के लिए रखे गए 5,80,21,442 शेयरों के मुकाबले ओएफएस के अंतिम दिन तक 41,56,68,400 शेयरों के लिए अस्थायी बोलियां मिलीं।
सरकार ने ओएफएस के जरिये हिंदुस्तान कॉपर के 5.80 करोड़ से अधिक शेयर यानी छह प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी। इसमें तीन प्रतिशत का ‘ग्रीन शू’ यानी अधिक बोली आने पर उसे रखने का विकल्प भी रखा गया है।
ओएफएस के लिए 514 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया गया था। यह मूल्य सोमवार को कंपनी के शेयर के बंद भाव से 10.38 प्रतिशत कम था।
बुधवार को बीएसई में हिंदुस्तान कॉपर का शेयर 4.38 प्रतिशत बढ़कर 556.55 रुपये पर बंद हुआ।
सरकार की हिंदुस्तान कॉपर में अभी तक 66.14 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
चालू वित्त वर्ष में सरकार आठ सार्वजनिक उपक्रमों में ओएफएस और एसयूयूटीआई से प्राप्त राशि के जरिये विनिवेश के रूप में करीब 52,716 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।
हिंदुस्तान कॉपर की हिस्सेदारी बिक्री से प्राप्त राशि को जोड़ने के बाद नौ सार्वजनिक उपक्रमों में अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री से विनिवेश मद में संग्रह बढ़कर करीब 55,700 करोड़ रुपये हो जाएगा।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण के जरिये 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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