नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) सरकार पश्चिम एशिया संकट के बीच आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को बनाये रखने के लिए सुधारों को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। इसमें विदेशी निवेश को आकर्षित करने, विनिवेश को गति देने तथा संपत्ति को बाजार पर चढ़ाने के लिए कदम शामिल हैं। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को यह बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन और उर्वरक का आयात बिल बढ़ने से बाहरी मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन घरेलू खपत बरकरार रहने से जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है।
सूत्रों ने कहा, ‘‘वृद्धि को लेकर कोई दबाव नहीं है, लेकिन बाहरी चुनौतियां जरूर हैं…। हर तिमाही में वृद्धि में तेजी दिख रही है। घरेलू अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है और खपत में कोई कमी नहीं आ रही है।’’
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की वजह से तेल और उर्वरक के आयात का बिल बढ़ने से भारत पर जो दबाव पड़ रहा है, वे सिर्फ सामान्य तरह की अनिश्चितताएं नहीं हैं।
सूत्रों ने बताया कि सरकार वित्तीय क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाना जारी रखेगी, जिनका मकसद पूंजी बाजार को मजबूत करना और लंबे समय के लिए विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है। देश में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्रवाह को बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठाने की जरूरत है और भारत धीरे-धीरे इन पर काम करेगा।
रुपये को समर्थन देने और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए हाल ही में उठाए गए कदमों का मकसद भारत को बड़े वैश्विक बॉन्ड सूचकांक में शामिल कराने की दावेदारी को मजबूत करना है। साथ ही, इससे घरेलू प्रतिभूतियों के लिए निवेशकों का दायरा बढ़ाने और समय के साथ उधार लेने की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने पिछले शुक्रवार को पूंजी बाजार को मजबूत करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) की भागीदारी बढ़ाने के मकसद से सुधारों की घोषणा की।
सूत्रों ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से ईंधन और उर्वरक के आयात की लागत बढ़ने से अर्थव्यवस्था को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन घरेलू खपत मजबूत बनी हुई है, इसलिए वृद्धि की रफ्तार बरकरार है।
उन्होंने कि कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में वैश्विक अर्थव्यवस्था में वैश्विक व्यापार तनाव और शुल्क से जुड़ी अनिश्चितताओं को ध्यान में रखा गया था और सरकार को फिलहाल अतिरिक्त कर्ज लेने या संसद के आगामी मानसून सत्र में पूरक अनुदान मांग लाने की जरूरत नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि जनवरी-मार्च तिमाही में दिखी वृद्धि की रफ्तार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भी जारी है और अब तक विदेशों में काम करने वाले भारतीयों भेजी जाने वाली राशि पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि अब तक बाहर से भेजे वाले पैसे में कोई कमी आई है।’’
शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही जो 2024-25 में 7.1 प्रतिशत थी।
सूत्रों ने कहा कि उच्च आयात बिल के बावजूद चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
सरकार ने राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार मौजूदा वित्त वर्ष में विनिवेश और संपत्तियों को बाजार पर चढ़ाने जैसे गैर-कर राजस्व के स्रोतों का सक्रिय रूप से उपयोग कर रही है।
सूत्र ने कहा, ‘‘निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) और सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) के पास विनिवेश और संपत्ति को बाजार पर चढ़ाने के लिए साल भर की योजना और मध्यम अवधि का परिदृश्य है। मुझे उम्मीद है कि इस मद में बजट में तय 80,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार हो जाएगा और दोनों विभाग इस पर काम कर रहे हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा कि आईडीबीआई बैंक का विनिवेश की योजना आगे बढ़ने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़े और मानसून पर अल-नीनो के असर की जानकारी मिलने के बाद जुलाई में वृहद आर्थिक आंकड़ों का फिर से आकलन किया जाएगा।
सूत्रों ने जीएसटी संग्रह समेत अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ये सब आर्थिक मजबूती के संकेत दे रहे हैं। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार निजी निवेश में भी तेजी आ रही है।
सूत्रों ने बताया कि दुनिया भर में उर्वरक की कीमतें बढ़ने के कारण, उर्वरक मंत्रालय ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए सब्सिडी में 100 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की है। बजट में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 1.77 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगाया गया था।
पेट्रोल और और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के बारे में सूत्रों ने कहा कि यह फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य जीएसटी परिषद के सामने इससे जुड़ा प्रस्ताव कब लाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी परिषद की अगली बैठक में सुधारों पर चर्चा हो सकती है। इसकी बैठक जल्द होने की उम्मीद है।
भाषा रमण अजय
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