नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) सरकार पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वित्तपोषण कंपनी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और उसकी अनुषंगी कंपनी आरईसी लिमिटेड के विलय पर विचार कर रही है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पीएफसी और आरईसी बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण परियोजनाओं के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट भाषण में सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को मजबूत करने की सरकारी योजना के तहत आरईसी लिमिटेड (पूर्व में ग्रामीण विद्युतीकरण निगम) और पीएफसी के पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया था।
इस घोषणा के बाद, रविवार को विशेष कारोबारी सत्र के दौरान दोनों कंपनियों के शेयरों में छह प्रतिशत तक का उछाल आया।
सूत्रों ने सोमवार को संकेत दिया कि पुनर्गठन के हिस्से के रूप में पीएफसी और आरईसी के बीच विलय हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय उच्चस्तर पर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके तौर-तरीकों पर बिजली मंत्रालय को काम करना होगा।
इससे पहले मार्च, 2019 में पीएफसी ने सरकार को 14,500 करोड़ रुपये हस्तांतरित करके आरईसी लिमिटेड में बहुमत हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा किया था। उस समय वित्त वर्ष 2019-20 में दोनों कंपनियों के विलय की उम्मीद थी, लेकिन तब यह विलय नहीं हो पाया था।
पीएफसी ने प्रबंधन नियंत्रण के साथ आरईसी में सरकार की 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी (103.94 करोड़ शेयर) का अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण की कीमत 139.50 रुपये प्रति शेयर तय की गई थी। यह हिस्सेदारी अधिग्रहण आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद किया गया था।
पीएफसी और आरईसी दोनों ‘नवरत्न’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम हैं।
सोमवार को बीएसई पर पीएफसी का शेयर 1.13 प्रतिशत बढ़कर 385.60 रुपये पर बंद हुआ, जबकि आरईसी लिमिटेड का शेयर 1.23 प्रतिशत चढ़कर 363.10 रुपये पर रहा।
भाषा सुमित अजय
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