नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को हाल ही में पेश केंद्रीय बजट और अपनी सरकार द्वारा किए गए व्यापार समझौतों को ‘विकसित भारत’ की नींव बताने के साथ निजी क्षेत्र से अब ‘अधिक आक्रामक’ और ‘साहसिक’ ढंग से आगे आने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने पीटीआई-भाषा को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ठोस व्यापार समझौते करने में विफल रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की ‘सबसे महत्वपूर्ण भूमिका’ होगी।
मोदी ने कहा कि राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत पूर्वानुमान लगा पाने की क्षमता ने भारत में निवेशकों का भरोसा बहाल किया है। उन्होंने कहा कि मजबूत विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के कारण भारत 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को ‘मजबूती की स्थिति’ में अंजाम दे पाया है।
उन्होंने अगले तीन दशक के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं गिनाईं। इनमें अधिक संरचनात्मक सुधार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवाओं में नवाचार को बढ़ाना और सरल शासन व्यवस्था शामिल हैं ताकि नागरिक और व्यवसाय अधिक सहजता और भरोसे के साथ काम कर सकें।
उन्होंने ‘सुधार एक्सप्रेस’ की प्रगति पर संतुष्टि के सवाल पर कहा, “स्वभाव से मैं कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता… सार्वजनिक जीवन एक रचनात्मक बेचैनी की मांग करता है। साथ ही, इस यात्रा में हुई प्रगति के पैमाने को स्वीकार करना भी महत्वपूर्ण है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या विकसित भारत के लिए ‘मूनशॉट’ (बड़ा लक्ष्य) लेने का यह ‘अब या कभी नहीं’ वाला पल है और क्या इसी वजह से बजट पारंपरिक ‘बही-खाता’ दस्तावेज जैसा नहीं रहा है, तो उन्होंने कहा, “हमारे किसी भी बजट को साधारण बही-खाता दृष्टिकोण से नहीं बनाया गया है। यदि पिछले 25 वर्षों के मेरे नजरिये पर गौर करे तो स्पष्ट होगा कि हमारा काम टुकड़ों में नहीं होता है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक व्यापक रणनीति, कार्ययोजना और प्रभावी क्रियान्वयन है, जो ‘राष्ट्रव्यापी सोच’, उद्देश्य की निरंतरता और दीर्घकालिक दृष्टि को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “यह बाध्यता से उपजा ‘अब या कभी नहीं’ वाला क्षण नहीं है, बल्कि तैयारी और प्रेरणा से उपजा ‘हम तैयार हैं’ वाला क्षण है। 2026-27 का बजट विकसित राष्ट्र बनने की इस आकांक्षा को दर्शाता है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस लिखित साक्षात्कार में कहा कि उनकी सरकार ने पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा छोड़े गए ‘संरचनात्मक अंतराल’ को दूर करने, साहसिक सुधार करने और विकसित भारत की नींव रखने का काम किया है।
भारत ने हाल में यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते किए हैं, जिनसे शुल्क में व्यापक कटौती और वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए बाजार पहुंच का विस्तार सुनिश्चित हुआ है। इसके अलावा अमेरिका के साथ शुल्क संबंधी मतभेद कम करने और व्यापारिक सहयोग गहरा करने पर भी सहमति बनी है। इन कदमों से उन्नत बाजारों में भारतीय निर्यातकों की पहुंच बेहतर हुई है और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से भारत का जुड़ाव मजबूत हुआ है।
मोदी ने कहा, “अब हमारे 38 साझेदार देशों के साथ एफटीए हैं, जो भारत के व्यापार इतिहास में अभूतपूर्व उपलब्धि है। इन समझौतों की विशेषता यह है कि ये विभिन्न महाद्वीपों और विविध आर्थिक ताकत वाले देशों तक फैले हुए हैं।”
उन्होंने कहा कि मुश्किल वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत वृद्धि का उज्ज्वल केंद्र बना हुआ है।
मोदी ने उत्पादक व्यय को अपनी सरकार की पहचान बताते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में अल्पकालिक लोकलुभावन उपायों से बचते हुए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय को बुनियादी ढांचे की ओर निर्देशित किया गया है, ताकि रोजगार और टिकाऊ वृद्धि को बढ़ावा मिले।
उन्होंने कहा, “बजट 2026 का समग्र उद्देश्य विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, मूल्य संवर्धन बढ़ाना और कौशल एवं पैमाने को एक साथ लाने की परिस्थितियां तैयार करना है। इसका परिणाम आत्मनिर्भरता और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।”
मोदी ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत की दिशा में अगली छलांग इस पर निर्भर करेगी कि भारतीय उद्यम कितने साहस से नवाचार में निवेश करते हैं, दीर्घकालिक क्षमता का निर्माण करते हैं और खुद को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, प्रौद्योगिकी रूप से आत्मविश्वासी और सामाजिक रूप से जिम्मेदार वृद्धि इंजन के रूप में स्थापित करते हैं।
उन्होंने निजी कॉरपोरेट क्षेत्र से शोध एवं विकास में अधिक निवेश, उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने, आपूर्ति शृंखला क्षमताओं को बढ़ाने और लाभांश बचाने के बजाय गुणवत्ता एवं उत्पादकता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “नीतियां केवल सक्षम ढांचा प्रदान कर सकती हैं। परिवर्तन के अगले चरण के लिए निजी क्षेत्र की निर्णायक प्रतिक्रिया आवश्यक है। प्रोत्साहन और शुल्क वरीयताएं वृद्धि को तेजी दे सकती हैं, लेकिन स्थायी प्रतिस्पर्धात्मकता नवाचार, दक्षता और पैमाने पर ही आधारित होगी।”
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘उत्पादकता बढ़ने के साथ लाभ का उचित वितरण श्रमिकों, शेयरधारकों और प्रबंधन के बीच होना चाहिए। टिकाऊ वृद्धि के लिए सामाजिक वैधता आवश्यक है।’’
रक्षा बजट में वृद्धि और सैन्य आधुनिकीकरण पर उन्होंने कहा कि पिछले दशक के रक्षा सुधारों के लाभ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान साफ तौर पर देखने को मिले और भारत को सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए हर समय तैयार रहना होगा।
बजट में डेटा सेंटर के लिए निवेश को दिए गए प्रोत्साहन का जिक्र करते हुए मोदी ने भारत को डिजिटल अवसंरचना और कृत्रिम मेधा (एआई) का वैश्विक केंद्र बनाने की वकालत की।
प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी ‘ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट’ से पहले आई है, जो 16 से 20 फरवरी तक नयी दिल्ली में आयोजित होगा। इसमें फ्रांस और ब्राजील के राष्ट्रपति समेत 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
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प्रेम अजय
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