नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) ईरान पर अमेरिका और इजरइल के साझा हमले के बीच खाड़ी क्षेत्र में घमासान बढ़ने और होर्मुज बंदरगाह के रास्ते आने वाले यातायात के प्रभावित होने से देश के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह मजबूती का रुख रहा तथा सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम मजबूती दर्शाते बंद हुए। गर्मियों की वजह से मांग प्रभावित रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में गिरावट देखी गई।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में टकराव बढ़ने के बाद विशेषकर सोयाबीन तेल का आयात प्रभावित होने की आशंका है। गौरतलब है कि देश में सोयाबीन तेल आयातित खाद्यतेलों में सबसे अहम हिस्सा रखता है। देश के बाकी तेल-तिलहन से घरेलू मांग के मामूली हिस्से की ही आपूर्ति हो पाती है। पहले सूरजमुखी जैसे तेल के मामले में देश अपनी जरुरतों को लगभग पूरा करने की स्थिति में था लेकिन बाजार की अस्थिरता और नीतियों की अस्पष्टता के कारण आज देश सूरजमुखी तेल आवश्यकता के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर हो चला है।
सूत्रों ने कहा कि बीते सप्ताह सरसों के नई फसल की आवक बढ़ने लगी है लेकिन खाड़ी क्षेत्र के युद्ध की सीमा हिन्दमहासागर तक फैलने के बाद खाद्यतेलों की आपूर्ति को लेकर आशंकायें मजबूत हुई हैं। इससे आम बाजार धारणा में तेजी कायम हो गयी है जिससे सरसों तेल-तिलहन अछूता नहीं रह पाया और आवक बढ़ने के बावजूद इसके दाम में मजबूती देखी गई।
बाजार में स्टॉकिस्टों को भी सक्रिय देखा जा रहा है। इस बीच, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात की सरकारों ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरसों खरीद करने की बात कही है जिससे सरसों किसानों में काफी राहत देखी जा रही है। यह सरकार का स्वागतयोग्य कदम है।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास सरसों का स्टॉक काफी कम रह गया है और उसे 20-25 लाख टन सरसों का स्टॉक बनाकर रखने की ओर ध्यान देना चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि कांडला बंदरगाह पर सूरजमुखी तेल का दाम लगभग 162 रुपये किलो है जबकि वहीं सोयाबीन रिफाइंड का दाम 138 रुपये किलो है। सूरजमुखी तेल के मंहगा होने से दक्षिण भारत और महाराष्ट्र जैसे खपत वाले राज्यों में सोयाबीन तेल पर मांग का दवाब बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन की बिजाई होने तक सरकार को, सरकारी एजेंसियों के पास जो स्टॉक है उसे रोक-रोक कर निकालना चाहिये। इससे आगे अक्टूबर में किसानों को सोयाबीन के अच्छे दाम मिलेंगे और बिजाई की स्थिति में भी सुधार होगा।
सूत्रों ने कहा कि बीते सप्ताह सरकारी एजेंसियों द्वारा मूंगफली की बिकवाली के असर से मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में गिरावट आई है।
उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के साथ पाम-पामोलीन की मांग में सुधार आया है। युद्ध की वजह से बाजार धारणा मजबूत रहने के कारण बीते सप्ताह पाम-पामोलन तेल के दाम भी मजबूत दिखे।
सूत्रों ने कहा कि आगे नवरात्र और शादी-विवाह के मौसम को देखते हुए बिनौला तेल की मांग बढ़ी है। मूंगफली तेल के मंहगा होने से भी विशेषकर गुजरात में बिनौला तेल की मांग मजबूत हुई है। इसके अलावा मजबूत बाजार धारणा और मंडियों में आवक कमजोर रहने से भी बीते सप्ताह बिनौला तेल के दाम में सुधार आया।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 125 रुपये के सुधार के साथ 6,600-6,625 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 300 रुपये के सुधार के साथ 13,750 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 40-40 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,325-2,425 रुपये और 2,355-2,470 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 250-250 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 5,600-5,650 रुपये और 5,200-5,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 350 रुपये के सुधार के साथ 14,800 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 350 रुपये के सुधार के साथ 14,500 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 250 रुपये के सुधार के साथ 11,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
बीते सप्ताह, सरकारी एजेंसियों की बिकवाली के कारण मूंगफली तेल तिलहन के दाम में गिरावट देखी गई। मूंगफली तिलहन 25 रुपये की गिरावट के साथ 6,975-7,450 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 250 रुपये की गिरावट के साथ 16,850 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 25 रुपये की गिरावट के साथ 2,665-2,965 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में कारोबारी धारणा में आम मजबूती के रुख के अनुरूप, सीपीओ तेल का दाम 575 रुपये के उछाल के साथ 12,350 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 600 रुपये के उछाल के साथ 14,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 650 रुपये के उछाल के साथ 13,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
मांग बढ़ने और आवक कम रहने के अलावा नवरात्र और शादी विवाह के मौसम की मांग के कारण बिनौला तेल का दाम 650 रुपये का उछाल दर्शाता 13,750 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश पाण्डेय
पाण्डेय