जापान के साथ बढ़ता व्यापार घाटा चिंता का विषय : फिक्की अध्यक्ष

जापान के साथ बढ़ता व्यापार घाटा चिंता का विषय : फिक्की अध्यक्ष

जापान के साथ बढ़ता व्यापार घाटा चिंता का विषय : फिक्की अध्यक्ष
Modified Date: August 25, 2026 / 10:03 am IST
Published Date: August 25, 2026 10:03 am IST

(फाइल फोटो के साथ)

तोक्यो, 25 अगस्त (भाषा) उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने मंगलवार को कहा कि जापान के साथ बढ़ता व्यापार घाटा भारतीय निर्यातकों के लिए चिंता का विषय है। इसलिए बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए जापान में भारतीय प्रमाणपत्रों को अधिक मान्यता देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कड़े प्रमाणन और नियामकीय मानदंड भी भारतीय निर्यातकों, खासकर जापानी बाजार में दवा कंपनियों के लिए प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं।

गोयनका ने कहा कि जापान के साथ भारत का व्यापार मुख्य रूप से एक ही दिशा में बढ़ा है और भारतीय कंपनियों को जापानी बाजार तक पहुंच बनाने में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘ यह (व्यापार घाटा) चिंता का विषय रहा है। मुझे लगता है कि इस अवधि में हमारा व्यापार घाटा बढ़ा है और विभिन्न बातचीत के दौरान मंत्री ने भी इस मुद्दे को उठाया है कि व्यापार बढ़ा है, लेकिन मुख्य रूप से एक ही दिशा में बढ़ा है। तो हम जापानी बाजारों तक कैसे पहुंच बनाएं? हम उत्पाद कैसे बनाएं और इसलिए गुणवत्ता भी एक ऐसा क्षेत्र है जहां जापान के कड़े मानकों के अनुरूप भारतीय विनिर्माण को भी स्तर बढ़ाना होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ हम इस दिशा में कुछ काम कर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि इस मोर्चे पर और काम किया जा सकता है। दूसरा पहलू कुछ हद तक सांस्कृतिक खुलापन भी है। जापान में जापानी कंपनियों के उत्पाद खरीदने को लेकर काफी हद तक पक्षपात है। मेरे विचार से इस समस्या को हल करने में कुछ समय लग सकता है।’’

गोयनका ने कहा कि भारतीय दवा कंपनियों को जापान में अपने उत्पादों का पंजीकरण कराने में विशेष दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘दवा कंपनियां अभी तक जापान में अपने उत्पादों का पंजीकरण भी नहीं करा सकती हैं।’’

उन्होंने कहा कि जापान में भारतीय प्रमाणपत्रों को मान्यता दिलाना भारतीय उद्योग की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।

फिक्की के अध्यक्ष ने कहा कि मिसाल के तौर पर ‘‘जापान में भारतीय प्रमाणपत्रों की मान्यता’’ से बाजार तक पहुंच बेहतर हो सकती है। इन मुद्दों का समाधान भारत-जापान मुक्त व्यापार समझौते की व्यापक समीक्षा के बाहर भी किया जा सकता है।

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में सालाना आधार पर 9.18 प्रतिशत बढ़कर 27.47 अरब डॉलर हो गया। 2025-26 में भारत का जापान को निर्यात 6.03 अरब डॉलर और आयात 21.43 अरब डॉलर रहा।

दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 15.4 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 12.66 अरब डॉलर था। यह 2023-24 में 12.53 अरब डॉलर और 2022-23 में 11 अरब डॉलर था।

गोयनका ने कहा कि प्रमाणन और नियामकीय बाधाओं को दूर करना द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित बनाने और भारतीय कंपनियों को जापानी बाजार में अवसर तलाशने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

उन्होंने कहा कि उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण, कृत्रिम मेधा, डेटा केंद्र, जहाज निर्माण, महत्वपूर्ण खनिज, इस्पात और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भारत और जापान के बीच सहयोग की काफी संभावनाएं हैं।

गोयनका ने कहा, ‘‘एक अन्य अवसर जिस पर हमने विचार किया, वह अफ्रीका के लिए भारत-जापान सहयोग है। दोनों देशों के पास अलग-अलग क्षमताएं हैं। अफ्रीका के साथ हमारे लंबे समय से संबंध हैं और वहां बड़ी संख्या में भारतीय मौजूद हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जापान के पास भी अपनी अनुसंधान एवं विकास क्षमताएं हैं। इसलिए हम इस दिशा में बढ़ रहे हैं कि दोनों मिलकर अफ्रीका में अधिक निवेश करें, वहां अधिक सामान बेचें और इस क्षेत्र में मिलकर कैसे काम करें।’’

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज ऐसे प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं जहां दोनों देश अफ्रीका में सहयोग कर सकते हैं।

गोयनका 5.2 अरब डॉलर के आरपीजी समूह के उपाध्यक्ष भी हैं। इस समूह की वाहन टायर, बुनियादी ढांचे, दवा, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा उत्पाद, बागान और उद्यम पूंजी के क्षेत्रों में कारोबारी रुचियां हैं।

भाषा निहारिका वैभव

वैभव


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