Uniform Civil Code CG/Image Credit: IBC24.in
सरकार के फैसले पर क्रिश्चयन सोसायटी ने अभी से सवाल उठा दिया है, वो इसे ईसाई-मुस्लिमों को टार्गेट करने के तौर पर देख रहे हैं, तो वहीं मुस्लिमों का एक वर्ग इसे सीधे-सीधे मुस्लिमों के खिलाफ बताते हुए, गैर संवैधानिक करार दे रहा है।
वहीं, इस मसले पर विपक्ष ने अभी से गोल-मोल जवाब देते हुए। सभी से बात कर, सभी की सहमति से इसे लागू करने की पैरवी की है। (Uniform Civil Code CG) पीसीस चीफ दीपक बैज इसे आदिवासियों के साथ छल बता रहे हैं। सत्ता पक्ष ने विरोध करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि प्रारूप सामने आने से पहले ही इतनी हाय-तौबा करना समझ से परे है।
वर्तमान में हिंदू-मुस्लिम यानि धर्म के हिसाब से – विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, भरण-पोषण और पारिवारिक विवाद निपटारे के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉज लागू हैं। जबकि संविधान का अनुच्छेद-44 राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का नीति निर्देश देता है। सवाल ये है कि बिना प्रारूप आए इसका अभी से विरोध क्यों? जबकि देश के जिन राज्यों में UCC लागू है वहां इससे किसी भी धर्म या जाति के लोगों का कोई बड़ा विरोध या नुकसान सामने नहीं आया है।
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