विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच अधिक तेल-तिलहन के दाम टूटे

विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच अधिक तेल-तिलहन के दाम टूटे

विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच अधिक तेल-तिलहन के दाम टूटे
Modified Date: June 15, 2026 / 09:49 pm IST
Published Date: June 15, 2026 9:49 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) अमेरिका-ईरान के बीच समझौते का मार्ग प्रशस्त होने के बीच सोमवार को स्थानीय कारोबार में मूंगफली छोड़कर लगभग सभी तेल-तिलहनों के दाम में गिरावट दर्ज हुई। सबसे सस्ता होने के बावजूद मांग कमजोर रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज दोपहर 3.30 बजे गिरावट के साथ बंद हुआ। जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में लगभग 1.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है।

इस बीच, सरकार ने कच्चे पामतेल (सीपीओ) का आयात शुल्क मूल्य 22 रुपये क्विंटल, पामोलीन का 59 रुपये क्विंटल तथा सोयाबीन डीगम का आयात शुल्क मूल्य छह रुपये क्विंटल बढ़ाया है।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि विदेशी बाजारों में खाद्य तेल-तिलहनों के दाम टूटने के अलावा रुपये के मजबूत बंद होने से भी गिरावट को बल मिला। देश में विदशों से सोयाबीन का आयात बढ़ने की भी खबर है और ज्यादातर आयात का माल महाराष्ट्र पहुंचेगा। महाराष्ट्र में प्लांट वालों ने सोयाबीन के खरीद दाम में 150-200 रुपये क्विंटल की कमी की है जिससे सोयाबीन तेल-तिलहन में गिरावट है।

उन्होंने कहा कि ऊंचे दाम पर मांग कमजोर रहने से सरसों तेल-तिलहन में भी गिरावट रही। मलेशिया एक्सचेंज की गिरावट के कारण पाम-पामोलीन तेल में भी गिरावट आई। बाजार धारणा प्रभावित रहने के कारण बिनौला तेल के दाम भी गिरावट के साथ बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि मूंगफली तेल, सूरजमुखी से भी सस्ता हो गया है। लेकिन मांग काफी कमजोर रहने और बाजार धारणा नकारात्मक रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।

उन्होंने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत है इसके लिए देशी तेल-तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के अलावा इनका देश में बाजार भी विकसित करना होगा। इससे ना सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि देशी तेल का उत्पादन बढ़ने से खाद्य तेल-तिलहनों के दाम भी कम होंगे जैसा हाल के दिनों में सरसों, मूंगफली के मामले में अनुभव किया गया। विदेशी खाद्य तेलों की महंगाई से निपटने में सरसों, मूंगफली के बढ़े हुए उत्पादन के कारण काफी मदद मिली थी।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को सही लाभकारी दाम सुनिश्चित करे और बाकी सुविधायें उपलब्ध करा दे, किसान खुद ही तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने और बाजार को सुव्यवस्थित कर देने की क्षमता रखते हैं।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,650-7,675 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,575-7,150 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,480 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,460-2,760 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 15,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,580-2,680 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,580-2,725 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,900 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,400 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 15,900 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,450 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,250 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 6,900-6,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 6,750-6,825 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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