शिमला, 23 मार्च (भाषा) हिमाचल प्रदेश में उपभोक्ताओं को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल के लिए अधिक भुगतान करना होगा, क्योंकि विधानसभा ने सोमवार को मूल्य वर्धित कर (वैट) संशोधन विधेयक पारित कर दिया, जिसमें विपक्षी भाजपा के बहिर्गमन के बावजूद इन दोनों ईंधनों पर पांच रुपये प्रति लीटर तक ‘‘अनाथ और विधवा’’ उपकर लगाने का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ‘उद्देश्य और कारणों के विवरण’ में कहा कि अनाथों और विधवाओं के लिए कल्याणकारी उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन और मजबूती के लिए राजस्व का एक समर्पित, स्थिर और टिकाऊ स्रोत सुनिश्चित करने के लिए उपकर लगाया गया है।
हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक 2006 का विरोध करते हुए, रणधीर शर्मा (भाजपा) ने कहा कि उपकर लगाने के बाद, पड़ोसी राज्यों की तुलना में राज्य में पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाएंगे, जिससे ईंधन मुद्रास्फीति बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले से ही आशंका थी कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी।
विधेयक का विरोध करते हुए विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने भी कहा कि खाड़ी में युद्ध के कारण पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी का डर है और राज्य द्वारा लगाए गए अतिरिक्त उपकर से लोगों पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने विधेयक के नाम पर भी आपत्ति जताई।
त्रिलोक जम्वाल (भाजपा) ने कहा कि इससे ट्रक ड्राइवर से लेकर आम आदमी तक सभी वर्ग प्रभावित होंगे, जबकि सतपाल सिंह सत्ती (भाजपा) ने कहा कि इससे सीमेंट और अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार विधवाओं के नाम पर पैसा इकट्ठा कर रही है, जो ठीक नहीं है।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने उपकर भी लगाया है और राजस्व घाटा अनुदान (आरडीएफ) भी बंद कर दिया है और कहा कि भाजपा को उपकर कम करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डालना चाहिए।
उन्होंने भाजपा को राज्य विरोधी और अनाथों और विधवाओं के कल्याण के खिलाफ करार दिया।
भाषा राजेश राजेश अजय
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