नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली विधानसभा की लोक लेखा समिति (पीएसी) की सोमवार को सदन में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब के ठेकों की दोबारा निविदा निकालने में विफल रहने के कारण सरकार को 890 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा, आबकारी नीति 2021-22 के तहत लाइसेंस शुल्क में छूट देने के कारण 144 करोड़ रुपये का और नुकसान हुआ।
आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान तैयार और लागू की गई आबकारी नीति से संबंधित रिपोर्ट पेश करते हुए, पीएसी के चेयरमैन और भाजपा विधायक अजय महावर ने कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से महालेखा परीक्षक (कैग) के निष्कर्षों और आबकारी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई पर आधारित है, ताकि किसी भी जांच और कानूनी मामलों पर इसका कोई प्रभाव न पड़े।
दिल्ली में शराब के नियमन और आपूर्ति पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट 25 फरवरी, 2022 को दिल्ली विधानसभा के समक्ष रखी गई थी। सदन ने कैग रिपोर्ट को आगे की समीक्षा के लिए पीएसी को भेज दिया।
कैग की जांच में पाया गया कि दिल्ली में शराब की आपूर्ति और लाइसेंस देने में कई अनियमितताएं थीं। इन अनियमितताओं का कुल वित्तीय असर लगभग 2,026.91 करोड़ रुपये है।
पीएसी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जिन लाइसेंसों को लौटाया गया था, उनकी दोबारा निविदा नहीं निकाली गई, जिससे 890.15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
साथ ही, कोविड महामारी के दौरान लाइसेंस शुल्क में छूट देने के कारण 144 करोड़ रुपये का और नुकसान हुआ। इस छूट को ‘अनियमित’ माना गया।
भाषा योगेश अजय
अजय