मुंबई, 23 मार्च (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मार्च बुलेटिन में कहा गया है कि भारत को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर करीब से नजर रखनी होगी और उसके प्रभाव को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाने होंगे, क्योंकि देश कच्चे तेल पर काफी निर्भर है।
बुलेटिन में कहा गया कि भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और एक आर्थिक स्थिरीकरण कोष बनाने से देश को वैश्विक दबाव के समय वित्तीय सुरक्षा और राहत मिलेगी।
मार्च बुलेटिन में प्रकाशित लेख के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध और अमेरिका की नई व्यापार जांच ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है।
इस अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, अमेरिकी आयात शुल्क और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
लेख में चेतावनी दी गई कि लंबी अवधि तक युद्ध और उच्च अनिश्चितता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकती है।
इसमे कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था समय के साथ मजबूत हुई है और इसमें बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता बढ़ी है, जो इसके मजबूत विकास, स्वस्थ वृहद आर्थिक स्थिति और बाहरी सुरक्षा कोष से समर्थित है।
बुलेटिन में कहा गया कि ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाकर घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाई है। युद्ध शुरू होने के बाद कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं ताकि वैश्विक ईंधन आपूर्ति में बाधा का तत्काल असर कम किया जा सके और घरेलू उत्पादन का अधिक उपयोग किया जा सके।
इसमे कहा गया कि वित्त 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दूसरे अग्रिम अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं।
इसमें कहा गया, ‘‘अर्थव्यवस्था की स्थिति का संकेतक देने वाले आंकड़े फरवरी में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने का संकेत दे रहे हैं।’’
बुलेटिन में कहा गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई फरवरी में खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों के कारण बढ़ी।
इसमें कहा गया है कि प्रणाली में नकदी की स्थिति संतोषजनक बनी रही और वाणिज्यिक क्षेत्र को मिलने वाले कुल वित्तीय संसाधनों में वृद्धि हुई, जिसमें बैंक और गैर-बैंक दोनों स्रोतों से वित्तपोषण बढ़ा।
हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा कि लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखकों के हैं और भारतीय रिजर्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
भाषा योगेश अजय
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