शिमला, तीन सितंबर (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय और राजस्व घाटा निर्धारित सीमा से अधिक होकर क्रमश: 12,611.05 करोड़ रुपये और 6,804.61 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के राजस्व का 86 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर खर्च हो रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पेश की।
रिपोर्ट में तेजी से बढ़ते कर्ज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इसमें कहा गया है कि कर्ज निर्धारित सीमा से अधिक हो गया, जिससे वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार के पास विकास कार्यों यानी पूंजीगत व्यय के लिए बहुत कम धन बचा।
कैग ने कहा कि सरकार राजकोषीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के तहत निर्धारित लक्ष्यों के भीतर घाटे को रखने में विफल रही। राज्य का राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपये रहा, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.94 प्रतिशत है, जबकि राजकोषीय घाटा 12,611.05 करोड़ रुपये रहा, जो जीएसडीपी का 5.44 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का 86 प्रतिशत केवल वेतन, पेंशन और उपदान के भुगतान पर खर्च हुआ, जबकि अकेले वेतन और पेंशन पर 70 प्रतिशत खर्च किया गया।
राज्य की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 9.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सकल घरेलू उत्पाद में हिमाचल प्रदेश का योगदान 0.70 प्रतिशत रहा और पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में राज्य की हिस्सेदारी भी घटी है, जो चिंता का विषय है।
रिपोर्ट कहती है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी में 4.34 प्रतिशत की वृद्धि और गैर-कर राजस्व में 22.40 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद हिमाचल प्रदेश केंद्रीय अनुदान पर काफी हद तक निर्भर है। बिजली सब्सिडी और कर्ज राहत उपायों के कारण सब्सिडी पर खर्च में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
भाषा
योगेश अजय
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