हिंदुस्तान कॉपर चिली में चार ब्लॉक के अधिग्रहण की तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटी

हिंदुस्तान कॉपर चिली में चार ब्लॉक के अधिग्रहण की तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटी

हिंदुस्तान कॉपर चिली में चार ब्लॉक के अधिग्रहण की तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटी
Modified Date: July 10, 2026 / 07:04 pm IST
Published Date: July 10, 2026 7:04 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) ने शुक्रवार को कहा कि चिली की सरकारी कंपनी कोडेल्को से चार तांबा ब्लॉक के प्रस्तावित अधिग्रहण को लेकर प्रक्रिया सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और इसके लिए लेनदेन सलाहकार नियुक्त किए जा चुके हैं।

एचसीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अनुपम मिश्रा ने यहां उद्योग मंडल फिक्की के एक सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से कहा कि सलाहकार आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं और दोनों पक्षों में विभिन्न नियामकीय पहलुओं की जांच जारी है। उन्होंने कहा, “हम सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

यह घटनाक्रम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब भारत हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और तांबे के आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिशों में जुटा है। तांबे का बिजलीकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है।

तांबे की मांग और आपूर्ति के परिदृश्य पर मिश्रा ने कहा कि इसमें फासला बना हुआ है और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति से अधिक मांग है। उन्होंने कहा कि एचसीएल रिफाइनिंग क्षेत्र में अपेक्षाकृत छोटा योगदानकर्ता है और उसके लिए पर्याप्त मांग उपलब्ध है। उन्होंने लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) के रुझानों को भी कंपनी के लिए सहायक बताया।

उन्होंने एचसीएल को ‘नवरत्न’ का दर्जा मिलने के सवाल पर कहा कि यह प्रक्रिया जारी है और इस पर अंतिम निर्णय सरकार को लेना है।

इससे पहले खान सचिव पीयूष गोयल ने कहा था कि एचसीएल चिली के चार तांबा ब्लॉक के अधिग्रहण के अंतिम चरण में है। कंपनी पहले एक ब्लॉक के लिए बोली लगाने की योजना बना रही थी, लेकिन देश में तांबे की बढ़ती जरूरत और सीमित घरेलू उपलब्धता को देखते हुए अन्य सार्वजनिक कंपनियों के साथ मिलकर चार ब्लॉक के लिए बोली लगाने का निर्णय लिया गया।

एचसीएल इन ब्लॉक के लिए एनटीपीसी माइनिंग और कोल इंडिया लिमिटेड के साथ संयुक्त रूप से बोली लगा रही है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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